हाईकोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा
जबलपुर। राज्यपाल का पांच वर्ष का कार्यकाल 7 जुलाई 2026 को पूरा होने के बाद भी नई नियुक्ति नहीं किए जाने को चुनौती देने वाली जनहित याचिका पर हाईकोर्ट में लंबी बहस हुई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायमूर्ति आनंद पाठक एवं न्यायमूर्ति बी.पी. शर्मा की खंडपीठ ने मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
जनहित याचिका सामाजिक कार्यकर्ता एम.ए. खान की ओर से दायर की गई है। इसमें राष्ट्रपति के सचिव, भारत सरकार के विधि मंत्रालय तथा राज्यपाल के सचिव को अनावेदक बनाया गया है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अजय रायजादा एवं अभिमन्यु सिंह ने पैरवी की।
गजट अधिसूचना का दिया हवाला
याचिकाकर्ता पक्ष ने अदालत के समक्ष भारत सरकार की 8 जुलाई 2021 को जारी गजट अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन नियुक्ति पांच वर्ष की निर्धारित अवधि के लिए की गई थी। अधिवक्ताओं ने तर्क दिया कि निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप आवश्यक कदम उठाया जाना चाहिए।
याचिका में यह भी दलील दी गई कि नियमित नियुक्ति होने तक संवैधानिक कामकाज में किसी प्रकार का व्यवधान न हो, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था किए जाने की आवश्यकता है। याचिकाकर्ता पक्ष ने पूर्व की संवैधानिक परंपराओं और न्यायिक नजीरों का हवाला देते हुए सक्षम प्राधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की।
खंडपीठ ने दोनों पक्षों की संवैधानिक दलीलों, प्रस्तुत दस्तावेजों तथा पूर्व नजीरों पर विचार करने के बाद मामले में अंतिम आदेश सुरक्षित रख लिया है।


