24.7 C
Jabalpur
September 18, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

कूनो नेशनल पार्क में जन्मी मादा चीता ने चार शावकों को दिया जन्म, देश में अब संख्या बढ़कर हुई 56

भोपाल, देश में प्रोजेक्ट चीता के तहत अफ्रीका और नामीबिया से लाए गए चीतों को कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बसाया गया था। अब प्रोजेक्ट को बड़ी सफलता मिली है। भारत में जन्मी मादा चीता “केजीपी12” ने चार शावकों को जन्म दिया है। यह उपलब्धि ऐसे समय आई है, जब चीता पुनर्वास कार्यक्रम ने एक दिन पहले ही अपने चार वर्ष पूरे किए थे। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में जन्मी मादा चीता द्वारा शावकों को जन्म देना इस परियोजना की दीर्घकालिक सफलता का महत्वपूर्ण संकेत है। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने इस घटनाक्रम की घोषणा करते हुए इसे “प्रोजेक्ट चीता के लिए सचमुच एक ऐतिहासिक और खुशी का पल बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में केंद्रीय मंत्री ने कहा, “चार वर्ष, चार नई जिंदगियां… उम्मीद, हिम्मत और भारत में चीता संरक्षण की बढ़ती सफलता का एक सुंदर प्रतीक।”

उन्होंने पूरी कूनो और प्रोजेक्ट चीता टीम को बधाई दी। इन नए जन्मों के साथ भारत में चीतों की संख्या 52 से बढ़कर 56 हो गई है।कूनो नेशनल पार्क में अब 53 चीते हैं, जबकि तीन मध्य प्रदेश के गांधी सागर वन्यजीव अभयारण्य में हैं। अब भारत में पैदा हुए चीतों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है। 2024 में भारत में पैदा हुई ‘केजीपी12’, गामिनी की बेटी है। गामिनी एक मादा चीता है, जिसे फरवरी 2023 में दक्षिण अफ्रीका से लाया गया था। उसका सफल प्रसव इस कार्यक्रम की प्रगति में एक और महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि दूसरी पीढ़ी के शावक यह दिखाते हैं कि दोबारा लाए गए जानवर भारतीय परिस्थितियों में ढल रहे हैं और प्रजनन कर रहे हैं। कूनो नेशनल पार्क के वन कर्मचारियों ने शावकों को देखा और वे दूर से ही उन पर नजर रख रहे हैं। प्रोजेक्ट चीता 17 सितंबर 2022 को शुरू किया गया था, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से लाए गए पहले आठ चीतों को कूनो में छोड़ा था। इसके बाद 2023 में दक्षिण अफ्रीका से और 2026 में बोत्सवाना से और चीते लाए गए।

चार वर्षों में यह प्रोजेक्ट ढलने और जीवित रहने की शुरुआती चुनौतियों से आगे बढ़कर मजबूती के चरण में पहुंच गया है, जिसमें प्रजनन करने वाली मादाएं और भारत में पैदा हुई पीढ़ियों का जीवित रहना शामिल है। इस प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों और वन्यजीव संरक्षणवादियों ने इस खबर का स्वागत किया है और इसे प्राकृतिक आबादी वृद्धि का सकारात्मक संकेत माना है। भारत में जन्मी मां से चार शावकों का जन्म देश में चीतों की ऐसी आबादी की उम्मीदों को मजबूत करता है, जो खुद को बनाए रख सके। इस देश में यह प्रजाति 1952 में विलुप्त घोषित कर दी गई थी। कूनो टीम नए शावकों और बढ़ती आबादी की भलाई सुनिश्चित करने के लिए लगातार कड़ी निगरानी और आवास प्रबंधन का काम कर रही है।

अन्य ख़बरें

फडणवीस ने राहुल गांधी की समझ पर उठाए सवाल, बोले- चोट माथे पर लगी है, पट्टी घुटने पर कर रहे

Newsdesk

गंभीर अनियमितताओं पर एफएसएसएआई का बड़ा एक्शन, पैराडाइज डिस्टिलरीज का लाइसेंस निलंबित

Newsdesk

‘स्वाधीन समृद्धि ही वास्तविक वैभव है’, प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया सुभाषित

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading