मैहर। संगीत मनीषी एवं पद्मविभूषण उस्ताद बाबा अलाउद्दीन खाँ साहब की जयंती के पावन अवसर पर मंगलवार को उनकी मजार पर जिला प्रशासन के निर्देशन में श्रद्धा एवं संगीत साधना से ओतप्रोत कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में सर्वप्रथम बाबा साहब की मजार पर श्रद्धापूर्वक चादर चढ़ाई गई तथा फातिहा अदा कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इसके पश्चात बाबा अलाउद्दीन खाँ साहब की महान संगीत परंपरा को समर्पित नलतरंग वादन की शानदार प्रस्तुति हुई, जिसने उपस्थित श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम के दौरान बाबा साहब द्वारा स्थापित एवं निर्मित मैहर बैंड की संगीत परंपरा को भी स्मरण किया गया।
कार्यक्रम में माननीय तहसीलदार श्री लालमणि सतनामी, आरआई श्री लालमन, साकेत जी सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक एवं संगीतप्रेमी उपस्थित रहे।
नलतरंग वादक श्री सौरव चौरसिया के साथ श्री उत्तम पांडेय, अशोक बड़ौलिया, श्रीराम सुमन चौरसिया, गौतम भारती, श्री ब्रजेश द्विवेदी, श्री मोहम्मद अहमद खाँ, शशांक श्रीवास्तव, आनंद वर्मा, आनंद श्रीवास्तव, जितेश जैन, जयंत जैन एवं नसीब खान,अजय नामदेव , श्री ब्रिजेश पांडे जी अधिवक्ता श्री मनीष मालवीय जी, इलाहाबाद श्री मनोज कुशवाहा जी सतना। उपस्थिति एवं सहभागिता रही।
कार्यक्रम में प्रस्तुत नलतरंग के मधुर एवं मनमोहक स्वरों ने बाबा अलाउद्दीन खाँ साहब की उस महान संगीत साधना की यादों को जीवंत कर दिया, जिसने मैहर को देश-दुनिया के संगीत मानचित्र पर विशिष्ट पहचान दिलाई।
इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने बाबा साहब की मजार पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुए उनकी अमूल्य संगीत विरासत को नमन किया। कार्यक्रम ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि मैहर की मिट्टी में संगीत केवल कला नहीं, बल्कि साधना, संस्कार और परंपरा है।
बाबा अलाउद्दीन खाँ साहब की जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम श्रद्धा, संगीत और मैहर की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत का सुंदर संगम बनकर यादगार रहा।


