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Jabalpur
October 27, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

लक्ष्मीपुर के परिवारों की बेदखली पर हाईकोर्ट का फैसला सुरक्षित



पट्टाधारियों को बिना पुनर्वास हटाने पर उठे सवाल, नगर निगम और जेडीए की भूमिका भी चर्चा मेंजबलपुर। लक्ष्मीपुर क्षेत्र में करीब 200 से 250 परिवारों की झुग्गी-झोपड़ियां हटाने के मामले में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। न्यायमूर्ति विशाल मिश्रा की अदालत में हुई सुनवाई के दौरान जबलपुर नगर निगम, जबलपुर विकास प्राधिकरण (जेडीए), केसरवानी शिक्षा समिति तथा याचिकाकर्ता और हस्तक्षेपकर्ता झुग्गीवासियों का पक्ष सुना गया।
मामले के अनुसार, एमआर-4 से लगी लक्ष्मीपुर की लगभग आठ हेक्टेयर भूमि का वर्ष 1990 में जबलपुर विकास प्राधिकरण द्वारा अधिग्रहण किया गया था। यह भूमि विकास योजना के तहत तालाब को भरकर आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित की गई थी। क्षेत्र से लगी जमीन पर शैक्षणिक संस्थान के लिए जगह छोड़ी गई थी, जहां केसरवानी शिक्षा समिति ने कॉलेज स्थापित किया। बाद में विवादित भूमि को लेकर बेदखली की कार्रवाई का मामला हाईकोर्ट पहुंचा।
डेमोक्रेटिक लॉयर्स फोरम के सचिव रविंद्र गुप्ता और वरिष्ठ अधिवक्ता शशांक शेखर ने झुग्गीवासियों की ओर से दलील दी कि क्षेत्र में रहने वाले परिवारों में करीब 50 से 100 परिवार पट्टाधारी हैं। उनके अनुसार, मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 1998 में कई परिवारों को नगरीय क्षेत्र के भूमिहीनों से संबंधित प्रावधानों के तहत 28 वर्ष की अवधि के पट्टे दिए थे। ऐसे परिवारों को बिना वैकल्पिक व्यवस्था और मुआवजे के हटाने पर सवाल उठाए गए।
अधिवक्ताओं ने बताया कि 23 जुलाई को प्रशासन अतिक्रमण हटाने पहुंचा था। हस्तक्षेप के बाद प्रशासन ने 24 घंटे का समय दिया, लेकिन अगले दिन हाईकोर्ट के समक्ष मामला उठाए जाने पर बेदखली की कार्रवाई और बिजली काटने पर रोक लगा दी गई थी।
सुनवाई के दौरान यह मुद्दा भी उठाया गया कि पूर्व में दिए गए आदेश के समय प्रभावित गरीब परिवारों और पट्टाधारियों की स्थिति अदालत के संज्ञान में नहीं लाई गई थी। हस्तक्षेपकर्ताओं ने संबंधित पक्षों की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता की भूमिका पर भी आपत्ति जताई।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले दो दशकों में क्षेत्र में नए परिवारों के बसने से आबादी बढ़ी है। अब सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने निर्णय सुरक्षित कर लिया है। प्रभावित परिवारों को राहत मिलेगी या बेदखली की कार्रवाई आगे बढ़ेगी, यह हाईकोर्ट के अंतिम आदेश के बाद स्पष्ट होगा।

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