वेंटिलेटर पर रखे बिना किया सफल उपचार, SNCU की चिकित्सकीय टीम की उपलब्धिजबलपुर। रानी दुर्गावती महिला चिकित्सालय (एल्गिन अस्पताल) में आधुनिक चिकित्सा तकनीक की मदद से गंभीर स्थिति में पहुंचे समय से पहले जन्मे नवजात शिशु का सफल उपचार किया गया। अस्पताल की स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. विजया जायसवाल और उनकी टीम ने LISA (लेस इनवेसिव सर्फैक्टेंट एडमिनिस्ट्रेशन) तकनीक का सफल इस्तेमाल कर नवजात को वेंटिलेटर पर रखे बिना उपचार उपलब्ध कराया। कम वजन और सांस लेने में गंभीर परेशानी से जूझ रहे शिशु के लिए यह उपचार महत्वपूर्ण साबित हुआ।
इस चिकित्सकीय सफलता में नर्सिंग ऑफिसर हेमलता और नूतन ने भी अहम भूमिका निभाई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नवीन कोठारी, अस्पताल अधीक्षक डॉ. नीता पाराशर, SNCU प्रभारी डॉ. पल्लवी लोंदें और वरिष्ठ चिकित्सकों ने पूरी टीम की सराहना की।
क्या है LISA तकनीक
समय से पहले जन्म लेने वाले बच्चों के फेफड़े पूरी तरह विकसित नहीं हो पाते। ऐसे में सर्फैक्टेंट नामक पदार्थ की कमी के कारण उन्हें सांस लेने में परेशानी हो सकती है। इसे रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम कहा जाता है। LISA तकनीक में एक पतली कैथेटर के माध्यम से बच्चे के फेफड़ों तक सर्फैक्टेंट दवा पहुंचाई जाती है। इस प्रक्रिया के दौरान बच्चा स्वयं सांस लेता रहता है और कई मामलों में उसे सांस लेने के लिए वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत कम हो सकती है।
नवजात के उपचार में आधुनिक विकल्प
इस तकनीक का उद्देश्य पारंपरिक वेंटिलेशन से जुड़े संभावित जोखिमों को कम करते हुए नवजात के फेफड़ों को आवश्यक उपचार उपलब्ध कराना है। इससे फेफड़ों को नुकसान पहुंचने और लंबे समय तक सांस संबंधी सहायता की जरूरत पड़ने का जोखिम कम हो सकता है। हालांकि, उपचार की सफलता बच्चे की स्थिति और चिकित्सकीय आकलन पर निर्भर करती है।
डॉ. विजया जायसवाल के अनुसार, समय से पहले जन्मे बच्चों का उपचार चुनौतीपूर्ण होता है। LISA जैसी आधुनिक तकनीक गंभीर नवजातों को कम आक्रामक तरीके से उपचार देने में मदद करती है। सरकारी अस्पताल के SNCU में इस तकनीक का सफल इस्तेमाल नवजात चिकित्सा सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है।


