मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में सड़क दुर्घटना (RTA) के बाद भर्ती 40 वर्षीय मरीज श्री नरेंद्र रजक के अंगदान से मानवता और सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है।
आज अंगदान के बाद नरेंद्र रजक को सशस्त्र सम्मान के साथ प्रशासन की ओर से ए.डी.एम श्री रविशंकर राय,एसडीएम श्री मदन रघुवंशी एवं गोहलपुर थाना प्रभारी श्री रितेश पांडेय अस्पताल प्रशासन,डॉ. शैलेन्द्र सिंह राजपूत, डॉ. राजीव सावंत, डॉ. प्राची शर्मा, डॉ. राहुल चतुर्वेदी, डॉ. के.के. वर्मा, डॉ. प्रियंक दुबे एवं डॉ. अरविंद जैन डॉ. अभिषेक दुबे एवं समस्त स्वास्थ्यकर्मियों ने नरेंद्र रजक को नम आंखों से अंतिम विदाई दी।
मरीज श्री नरेंद्र रजक को सड़क दुर्घटना के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों द्वारा आवश्यक चिकित्सकीय जांच के उपरांत उन्हें ब्रेन डेड घोषित किया गया। इस कठिन परिस्थिति में उनके परिजनों ने साहस और मानवता का परिचय देते हुए अस्पताल प्रशासन से मरीज के अंगदान की इच्छा व्यक्त की।
परिजनों की इस महान पहल का सम्मान करते हुए अस्पताल प्रबंधन एवं चिकित्सकों ने आपसी विचार-विमर्श और आवश्यक चिकित्सकीय एवं कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार अंगदान की व्यवस्था की। इसके अंतर्गत मरीज का लिवर, दोनों किडनी एवं आंखें दान करने का निर्णय लिया गया।
इस ऐतिहासिक एवं मानवीय अंगदान अभियान को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल के चिकित्सकों, मेडिकल टीम एवं समस्त कर्मचारियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। इस कार्य में विशेष रूप से डॉ. राजेश पटेल (यूरोलॉजी कंसल्टेंट), डॉ. विशाल वडेरा,( नेफ्रोलॉजिस्ट कंसल्टेंट) डॉ. शैलेन्द्र सिंह राजपूत, डॉ. राजीव सावंत, डॉ. प्राची शर्मा, डॉ. राहुल चतुर्वेदी, डॉ. के.के. वर्मा, डॉ. प्रियंक दुबे एवं डॉ. अरविंद जैन डॉ. अभिषेक दुबे सहित अन्य चिकित्सकों ने अपनी विशेषज्ञता, अनुभव और पूर्ण समर्पण के साथ महत्वपूर्ण योगदान दिया।
अंगों को निर्धारित समय पर जरूरतमंद मरीजों तक पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। रात के समय मरीज का लिवर अहमदाबाद स्थित CIMS हॉस्पिटल भेजा गया। वहीं एक किडनी मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल में तथा दूसरी किडनी नेताजी मेडिकल कॉलेज में प्रत्यारोपण के लिए भेजी गई। आंखों का दान भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार किया गया।
श्री नरेंद्र रजक के इस महान अंगदान से कई जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन और नई रोशनी मिली उनके परिजनों का यह निर्णय समाज के लिए एक प्रेरणादायक संदेश है कि अंगदान से किसी दूसरे व्यक्ति को जीवन का अनमोल उपहार दिया जा सकता है।
*नरेंद्र वाटिका’ में जीवित रहेंगे नरेंद्र *
मेट्रो प्राइम हॉस्पिटल परिसर में श्री नरेंद्र रजक की स्मृति को सदैव जीवित रखने के उद्देश्य से एक पौधा लगाकर “नरेंद्र वाटिका” नाम दिया गया। अस्पताल प्रबंधन की इस पहल का उद्देश्य उनके महान अंगदान एवं मानवता के प्रति समर्पण को हमेशा याद रखना है। यह वाटिका आने वाली पीढ़ियों को भी अंगदान और परोपकार की प्रेरणा देती रहेगी। श्री नरेंद्र रजक भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके इस महान योगदान और स्मृतियों को नरेंद्र वाटिका के माध्यम से सदैव संजोकर रखा जाएगा।
अस्पताल के डायरेक्टर श्री राजीव बडेरिया ने इस अवसर पर कहा कि, “अंगदान को महादान माना गया है, क्योंकि इसके माध्यम से एक व्यक्ति मृत्यु के बाद भी कई लोगों को नया जीवन देने का माध्यम बन सकता है। अंगदान केवल किसी जरूरतमंद को जीवन देने का कार्य नहीं है, बल्कि यह मानवता, संवेदनशीलता और समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारी का भी प्रतीक है। श्री नरेंद्र रजक के परिजनों ने दुख की इस घड़ी में अंगदान का निर्णय लेकर समाज के सामने एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत किया है। हमारा प्रयास है कि अधिक से अधिक लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक किया जाए, ताकि जरूरतमंद मरीजों को नया जीवन मिल सके।”


