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June 19, 2026
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आईआईटी मद्रास : धार्मिक नेता, संगीतकार, शतरंज खिलाड़ी और अनेक प्रतिभावान सितारों को तराशने का गौरव मिला

चेन्नई, 5 दिसम्बर (आईएएनएस)| भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मद्रास से न केवल वैज्ञानिक, प्रौद्योगिकीविद, उद्योगपति, व्यवसायी और शीर्ष अधिकारी बल्कि दूसरों क्षेत्रों की भी जानी-मानी हस्तियों को यहां पढ़ने का गौरव मिला।

धार्मिक नेता निर्मलानंदनाथ स्वामीजी, कर्नाटक संगीतकार – गिटारवादक आर. प्रसन्ना और गायक एस. सौम्या – और शतरंज खिलाड़ी एस. कैलासनाथन और एम. रमेश, इस प्रतिष्ठित संस्थान के विशिष्ट पूर्व छात्र हैं।

1959 में जर्मन सहायता से स्थापित, आईआईटी मद्रास, एक प्रतिष्ठित संस्थान है, जिसमें लगभग 550 संकाय है। यह 10,000 से अधिक छात्रों और 1,250 से अधिक प्रशासनिक- सहायक कर्मचारियों के साथ एक आवासीय संस्थान है।

चेन्नई के केंद्र में लगभग 250 हेक्टेयर हरियाली में स्थित, आईआईटी मद्रास के पूर्व छात्रों के ये कुछ प्रमुख नाम है, जैसे कि प्रेम वत्स, संस्थापक-अध्यक्ष, फेयरफैक्स होल्डिंग्स, इंफोसिस के संस्थापकों में से एक, क्रिस गोपालकृष्णन, आनंद राजाराम और वेंकी हरिनारायणन, कैम्ब्रियन वेंचर्स के सह-संस्थापक, कोस्मिज, जंगली कॉर्प (अमेजॅन द्वारा अधिग्रहित), गुरुराज देशपांडे, संस्थापक, सेकमोर नेटवर्कस, टीटी जगन्नाथन, अध्यक्ष, टीटीके समूह।

यहां आईआईटी मद्रास के उन पूर्व छात्रों के थंबनेल स्केच हैं, जिन्होंने अपने-अपने क्षेत्रों में अपनी पहचान बनाई है।

एस. कैलासनाथन, प्रबंध निदेशक, माइक्रोसेंस ग्रुप:

माइक्रोसेंस ग्रुप के प्रबंध निदेशक, सत्तर वर्षीय एस. कैलासनाथन ने आईआईटी-मद्रास के छात्र के रूप में तमिलनाडु शतरंज चैंपियनशिप जीती है। उन्हें पश्चिम बंगाल और दिल्ली के लिए शतरंज खेलने का गौरव भी प्राप्त है।

माइक्रोसेंस प्रमुख रूप से प्रमुख होटल श्रृंखलाओं और आवासीय अपार्टमेंटों में वाईफाई कनेक्टिविटी की पेशकश कर रहा है। समूह जल्द ही मध्य पूर्व के बाजार में प्रवेश करेगा।

आईआईएम-कलकत्ता से अपनी व्यवसाय की डिग्री प्राप्त करने के बाद, कैलासनाथन ने इलेक्ट्रॉनिक्स व्यापार और प्रौद्योगिकी विकास निगम के साथ अपना करियर शुरू किया। 1980 के दशक में, उन्होंने माइक्रोसेंस समूह की स्थापना की थी।

कई युवा शतरंज खिलाड़ियों को प्रायोजित करते हुए, माइक्रोसेंस ने आगामी भारतीय खिलाड़ियों के लिए कोचिंग शिविरों का भी आयोजन किया, जिसमें शतरंज के दो दिग्गज – पूर्व विश्व चैंपियन जीएम व्लादिमीर बोरिसोविच क्रैमनिक और जीएम बोरिस गेलफैंड शामिल थे।

निर्मलानंदनाथ स्वामीजी, आदिचुंचनागिरी मठ प्रमुख :

आईआईटी मद्रास से एमटेक निर्मलानंदनाथ स्वामीजी, का असली नाम नागराज गौड़ा था। उन्हें आदिचुंचनागिरी मठ के प्रमुख के रूप में नियुक्त किया गया था।

आईआईटी-मद्रास में शामिल होने से पहले, उन्होंने सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज से डिप्लोमा और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग, मैसूर से सिविल इंजीनियरिंग में बीई पूरा किया था।

1998 में, वे सांसारिक जीवन को त्याग कर ‘संन्यासी’ (संत) बन गए, और 2013 में निर्मलानंदनाथ आदिचुंचनागिरी मठ के प्रमुख बने।

आर प्रसन्ना, गिटार वादक :

आर प्रसन्ना गिटार पर पारंपरिक कर्नाटक संगीत बजाने में अग्रणी हैं। वह लोकप्रिय रूप से ‘गिटार प्रसन्ना’ के रूप में जाना जाता है, उन्होंने आईआईटी मद्रस में नौसेना वास्तुकला का अध्ययन किया था।

अमेरिका में रहने वाले प्रसन्ना कहते हैं कि उन्हें गिटार में दिलचस्पी पांच साल की उम्र में हुई जब उन्होंने रानीपेट में अपने पड़ोसी को वाद्य यंत्र बजाते देखा। उनका कहना है कि कर्नाटक संगीत उनके डीएनए का हिस्सा है और इसे सीखने के लिए अपनी मां का धन्यवाद करते हैं।

बाद में, रॉक बैंड के हिस्से के रूप में, उन्होंने भारत के विभिन्न हिस्सों का दौरा किया।

संगीत पर 100 प्रतिशत ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लेते हुए, उन्होंने अपना सॉफ्टवेयर पेशा छोड़ दिया और बर्कली कॉलेज ऑफ म्यूजि़क से जैज और शास्त्रीय रचना में पढ़ाई की।

प्रसन्ना ने इलैयाराजा, ए.आर. रहमान, हैरिस जयराज और अन्य के साथ काफी शो किए है।

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