शिव की काशी पर मोहित हो गई थीं 64 योगिनियां, यहीं बस गईं, अब चौसट्टी देवी के रूप में होती है पूजा
chausatti devi temple। “देखी तुमरी काशी, जहां विराजैं विश्वनाथ विश्वेश्वरजी अविनाशी…” हिंदी साहित्यकार भारतेन्दू हरिश्चंद्र की यह कविता काशी की सुंदरता का उल्लेख करती है।...

