भोपाल,१७ अगस्त (आरएनएस)। मध्यप्रदेश के भूतपूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के बारे में लोग अब यह कहने से नहीं चूक रहे हैं कि आखिर सत्ता गंवाने के बाद कमलनाथ की जो स्थिति इन दिनों सत्ता में आने के लिये फडफ़ड़ा रही है वह देखने लायक है जब वह कांग्रेस के १५ महीनों के शासनकाल में जब वह मुख्यमंत्री थे तब उन्हें आम जनता तो छोडिय़े उन्हें विधायकों तक से मिलने की फुर्सत नहीं थी यदि शिवराज और भाजपा के आरोपों को सही मानें तो उन दिनों कमल नाथ ने वल्लभ भवन को भ्रष्टाचार का अड्डा बना रखा था यही वजह थी कि उन्हें जनता की सुध लेने की जरूरत महसूस नहीं हुई वह एसी का आनंद लेते रहे। वैसे यदि कांग्रेस शासनकाल की बात करें तो अकेले कमलनाथ ही नहीं बल्कि हर कांग्रेस का मंत्री और नेता धन बटोरने में लगा था कई मंत्रियों की तो यह स्थिति थी तो इस प्रदेश में कमलनाथ सरकार के तबादला उद्योग के दौरान अपने नाते-रिश्तेदारों को इस तरह से सक्रिय कर रखा था कि वह राजधानी की होटलों में बैठकर तबादला उद्योग का सौदा करते थे तो वहीं मंत्री भी बीमारी का बहाना लेकर अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद वहां भी तबादला उद्योग का सौदा करने से नहीं चूकते थे, यही नहीं इसी कमलनाथ सरकार में नीमच के प्रभारी मंत्री हुकुमसिंह कराड़ा की तो यह स्थिति थी कि यदि आम जनता उनसे शिकायत करती थी तो वह उसे धमकी देने से नहीं चूकते थे कि यदि हमारा विधानसभा क्षेत्र होता तो इतने जूतों से पिटवा देता कि तेरा हाल बेहाल हो जाता? कांग्रेस शासनकाल में कई मंत्री ऐसे थे जो वर्षों पुराने अपने दोस्तों को भी भूल गये थे और कमलनाथ सरकार में चल रही परम्परा को आगे बढ़ाकर धन बटोरने में लगे हुए थे तो वहीं दिग्विजय सिंह के वह मिर्ची बाबा जो आजकल बलात्कार के मामले में जेल की हवा खा रहे हैं वह तो प्रदेश की रेत की खदानों की घाट पर जाकर एक-दो लाख वसूलने में लगे हुए थे आज वही मिर्ची बाबा बलात्कार के आरोप में जेल के अंदर हैं। लेकिन कमलनाथ की सरकार जाने के बाद वह इस तरह से फडफ़ड़ाये हुऐ हैं कि उन्हें एक ज्योतिषि ने २६ जनवरी को मुख्यमंत्री बनने का गणित क्या दे दिया था इस दौरान वह तो अपने आपको मुख्यमंत्री ही समझने लगे थे, यही स्थिति फिर बन गई है किसी ज्योतिषि ने २०२३ की सत्ता का कमान संभालने झुनझुना थमा रखा है उस झुनझुने को थामकर कमलनाथ इन दिनों सत्ता गंवाने के बाद अब अपने हेलीकाप्टर से कहीं नगरीय निकाय चुनाव के दौरान जहां अव्यवस्था फैले वहां पहुंचने की धमकी देते रहे और अब हाल ही में उन्होंने धार जिले के कारम डैम का हवाई सर्वे किया उनके इस हवाई सर्वे करने से बांध पीडि़तों में अपनी साख जमाने का प्रयास हवाई सर्वे के माध्यम से करते रहे, सवाल यह उठता है कि जब यही कमलनाथ मुख्यमंत्री थे तो इन्हीं की सरकार के अधिकारियों और मंत्री की लापरवाही के कारण मंदसौर डैम की जो स्थिति बनी थी उसके कारण और अतिवर्षा के कारण भिण्ड, मुरैना, चंबल संभाग में हजारों लोग अतिवर्षा से पीडि़त होकर जूझते रहे लेकिन उस समय सत्ता के मद में उनकी उनकी सुध लेने की कमलनाथ को फु र्सत नहीं मिली क्योंकि उन दिनों अपनी सरकार की नीतियों के अनुरूप वल्लभ भवन नहीं छोडऩे की ठान रखी थी जिस देखकर प्रदेश की जनता के कई लोग यह कहने लगे थे कि उन्हें यह डर सता रहा था कि जनता के बीच गये तो किसी कांग्रेसी ने उनकी कुर्सी नहीं हथिया ले। लेकिन उनके शासन की कार्यशैली विधायकों व जनप्रतिनिधियों की तथा कमलनाथ व दिग्विजय सिंह के पुत्रमोह के चलते ज्योतिरादित्य सिंधिया की जो उपेक्षा की उसके चलते वल्लभ भवन छोड़कर उन्हें हवाई सर्वे के लिये आना पड़ रहा है और लगता है वह गहन बिहारी बनकर प्रदेश के गगन बिहारी होकर सत्ता हथियाने में लगे हुए हैं, अब देखना यह है कि इस हवाई सर्वे के परिणाम २०२३ के विधानसभा चुनाव में क्या आते हैं यह भविष्य के गर्भ में है?


