जबलपुर :- तानाशाह एक तंत्र आधुनिक युग में यह तंत्र अर्थ तंत्र के रूप से जाना जाता है पहले यह राजतंत्र का रूप लिए हुए था यदि आप मीडिया को देखते हैं तो पार्टियों में और नेताओं में सिमट जाएंगे l. आज तानाशाह एक तंत्र मैं अमन चमन दोनों से मेरा दोनों से मेरा बैर l. मिथ्या प्रचार छल-छदम मेरे अस्त्र शास्त्र हैं l. मैं नहीं चाहता पड़ोस के घर में सुख चैन हो l. मैं नहीं चाहता देश में लोकतंत्र पनपे l. मैं नहीं चाहता बेरोजगारों को रोजगार मिले l. मैं नहीं चाहता कि वहां ढोल धमाके बजे l. मैं नहीं चाहता कि पनघट पर गागर छलके l मैं नहीं चाहता कि पेट्रोल और डीजल के दाम कम हो.l मैं नहीं चाहता कि महँगाई कम हो l. मैं नहीं चाहता कि व्हाइट कॉलर लोग लाल बत्ती पर चलें l मैं चाहता हूं कि आज 2024 में हम सब समान परिदृश्य मैं हों, अर्थlत छोड़ पढाई पकड़ कढाई मिलकर तले पकौड़ा l मैं हूँ द्वापर का कंस मैं हूं एक रावण, हिटलर बनकर राज करूं, मैं हुं जिनपिंग का मित्र l तुमने इतिहास को बदलने की कोशिश की, तुमने हवाओं में जहर फैलाया और देश में उगले सर्प पर बिच्छू अब नहीं उठेंगे हाथ तेरी जय जयकार के l
यदि संविधान को बचाना है l तो उन्हें 19 अप्रैल 2024 को होने जा रहे लोकसभा चुनाव में आप इंडीया गठबंधन को जीताते हैं तो अपने आपको सुरक्षित महसूस कर सकते हैं l हर कोई यहां किसी न किसी पार्टी का गुलाम है इसलिए भारत का यह हाल है कि किसान बेहाल है और नेता मालामाल है l
पंचम झा. देश की बात फाउंडेशन को कार्डिनेटर , मध्य प्रदेश |


