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June 10, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

सतना लोकसभा सीट उलझी त्रिकोणीय संघर्ष में

सतना, 22 अप्रैल | मध्य प्रदेश के विंध्य इलाके की सतना संसदीय सीट त्रिकोणीय मुकाबले में उलझ गई है। यहां भाजपा और कांग्रेस के बीच हो रहे मुकाबले को बसपा ने त्रिकोणीय बना दिया है।

सतना लोकसभा सीट से भाजपा ने पांचवीं बार गणेश सिंह को उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस ने विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा को मौका दिया है। इसके अलावा बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी मैदान में हैं।

यह ऐसा संसदीय क्षेत्र है जहां जातीय गणित काफी अहम है। यहां ब्राह्मणों के साथ पिछड़े वर्ग के मतदाता भी अधिक संख्या में हैं। यही कारण है कि जातीय गणित को ध्यान में रखकर तीनों ही दलों ने उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। गणेश सिंह का नाता कुर्मी, सिद्धार्थ कुशवाहा का कुशवाहा और नारायण त्रिपाठी का ब्राह्मण वर्ग से है।

सतना संसदीय क्षेत्र के इतिहास पर गौर करें तो यहां अब तक 15 लोकसभा चुनाव हुए हैं जिनमें भाजपा ने नौ बार जीत दर्ज की है जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार पांच बार निर्वाचित हुए। एक बार बहुजन समाज पार्टी को जीत मिली है।

गणेश सिंह बीते चार चुनाव से भाजपा के उम्मीदवार हैं और जीत दर्ज करते आ रहे हैं। एक बार फिर पार्टी ने उन पर भरोसा जताया है।

पिछले दिनों राज्य में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने सतना से गणेश सिंह को मैदान में उतारा था और उनका मुकाबला कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा से हुआ था। इस चुनाव में सिद्धार्थ कुशवाहा ने भाजपा उम्मीदवार गणेश सिंह को शिकस्त दी थी। एक बार फिर दोनों उम्मीदवार आमने-सामने हैं और पूर्व विधायक नारायण त्रिपाठी ने इस मुकाबले को पूरी तरह त्रिकोणीय बना दिया है।

भाजपा इस चुनाव में मोदी की गारंटी के आधार पर प्रचार को धारदार बनाए हुए है, वहीं कांग्रेस लगातार महंगाई और बेरोजगारी को मुद्दा बनाए हुए है, साथ ही गणेश सिंह की निष्क्रियता भी जोर-शोर से उठा रही है। वहीं बसपा उम्मीदवार दोनों ही दलों को घेरने में लगे हैं।

राज्य के विंध्य इलाके में लोकसभा की चार सीटें आती हैं। वर्ष 2019 के चुनाव में सभी स्थानों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। पहले चरण में इस इलाके की शहडोल और सीधी संसदीय सीट पर मतदान हो चुका है और दूसरे चरण में 26 अप्रैल को रीवा और सतना में मतदान होने वाला है।

सतना संसदीय क्षेत्र में विधानसभा की आठ सीटें आती हैं जिनमें से छह पर भाजपा और दो पर कांग्रेस का कब्जा है।

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