35.5 C
Jabalpur
May 29, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीयशिक्षा

22 भाषाओं में उपलब्ध होंगी 22 हजार महत्वपूर्ण पाठ्यपुस्तकें

नई दिल्ली,17 जुलाई । देश की 22 क्षेत्रीय भाषाओं में 22 हजार पाठ्यपुस्तकें तैयार की जाएंगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के मुताबिक इसके लिए यूजीसी के नेतृत्व में भारतीय भाषा समिति के सहयोग से ‘अस्मिता’ की शुरुआत की गई है। अस्मिता का उद्देश्य अगले पांच वर्षों में 22 अनुसूचित भाषाओं में 22000 पुस्तकें तैयार करना है। इसके साथ ही बहुभाषा शब्दकोष का एक विशाल भंडार बनाने की एक व्यापक पहल भी की गई है। वहीं तत्काल अनुवाद के उपाय, भारतीय भाषा में तत्काल अनुवाद क्षमताओं को बढ़ाने के लिए एक तकनीकी ढांचे के निर्माण की सुविधा भी प्रदान की जा रही है। केंद्रीय शिक्षा सचिव के. संजय मूर्ति ने मंगलवार को इन तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत की। ये परियोजनाएं अस्मिता (अनुवाद और अकादमिक लेखन के माध्यम से भारतीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री का संवर्धन), बहुभाषा शब्दकोष और तत्काल अनुवाद के उपाय हैं। केंद्रीय शिक्षा सचिव के मुताबिक इन सभी परियोजनाओं को आकार देने में प्रमुख भूमिका प्रौद्योगिकी की होगी, और एनईटीएफ और बीबीएस की इसमें बहुत बड़ी भूमिका होगी। मंगलवार को शिक्षा मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया। इसमें देश भर से 150 से अधिक कुलपतियों ने भाग लिया। कुलपतियों को 12 मंथन सत्रों में बांटा गया था, इनमें से प्रत्येक 12 क्षेत्रीय भाषाओं में पाठ्य पुस्तकों की योजना बनाने और विकसित करने के लिए समर्पित था। प्रारंभिक फोकस भाषाओं में पंजाबी, हिन्दी, संस्कृत, बंगाली, उर्दू, गुजराती, कन्नड़, मलयालम, मराठी, तमिल, तेलुगु और ओडिया शामिल थीं। समूहों की अध्यक्षता नोडल विश्वविद्यालयों के संबंधित कुलपतियों द्वारा की गई और उनके विचार-विमर्श से बहुमूल्य परिणाम सामने आए। चर्चाओं से मुख्य निष्कर्ष भारतीय भाषा में नई पाठ्य पुस्तकों के निर्माण को परिभाषित करना, पुस्तकों के लिए 22 भारतीय भाषाओं में मानक शब्दावली स्थापित करना और वर्तमान पाठ्यपुस्तकों के लिए संभावित सुधारों की पहचान करना, घटकों में से एक के रूप में भारतीय ज्ञान प्रणाली (आईकेएस) पर जोर देना, व्यावहारिक और सैद्धांतिक ज्ञान को जोड़ना शामिल था। शिक्षा राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने नई दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए भारतीय भाषा में पाठ्यपुस्तकों के लेखन पर कुलपतियों के लिए इस एक दिवसीय कार्यशाला का उद्घाटन किया। कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) और भारतीय भाषा समिति (बीबीएस) द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। इस अवसर पर शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग के सचिव के. संजय मूर्ति, भारतीय भाषा समिति के अध्यक्ष प्रो. चामू कृष्ण शास्त्री, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के अध्यक्ष प्रो. एम. जगदीश कुमार, 150 से अधिक विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रख्यात शिक्षाविद् और अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे। सुकांत मजूमदार ने विभिन्न उच्च शिक्षा पाठ्यक्रमों के लिए भारतीय भाषाओं में अध्ययन सामग्री तैयार करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि शिक्षा प्रणाली को देश की विशाल भाषायी विविधता को प्रतिबिंबित करना चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि छात्रों को उनकी मातृभाषा में ज्ञान प्राप्त हो। डॉ. मजूमदार ने कहा कि भारतीय भाषाएं राष्ट्र के प्राचीन इतिहास और पीढ़ियों से चली आ रही बुद्धिमत्ता का प्रमाण हैं। उन्होंने कहा कि युवा पीढ़ियों का पोषण किया जाना चाहिए और समृद्ध सांस्कृतिक और भाषाई विरासत में उनके विश्वास को मजबूत किया जाना चाहिए।

अन्य ख़बरें

भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम, नीति आयोग के फ्रंटियर टेक हब ने जारी किया 10 साल का रोडमैप

Newsdesk

माफिया अब खुली जीप में पिस्टल लहराते हुए किसी हिंदू को धमका नहीं सकता : सीएम योगी

Newsdesk

राहुल गांधी ने सीबीएसई के ओएसएम के लिए कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में गड़बड़ियों के आरोप लगाए

Newsdesk

Leave a Reply

Discover more from सी टाइम्स

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading