April 28, 2026
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माइंडफुलनेस : खुश रहने का सरल और प्रभावी तरीका, जानें क्या-क्या हैं इसके लाभ

नई दिल्ली, 4 जून । आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में अनिद्रा, तनाव, एंग्जाइटी और बेवजह की चिंता होना आम बात है। ऐसे में कुछ चीजों को अपनी जिंदगी में शामिल करके इसे बेहतर से भी बेहतरीन बनाया जा सकता है। ऐसी ही एक प्रैक्टिस है ‘माइंडफुलनेस’, जिसे हिंदी में ‘सजगता’ या ‘पूर्ण जागरूकता’ कहा जाता है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि माइंडफुलनेस हमें वर्तमान में जीना सिखाता है, जिससे मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है। इसे रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करने के लिए बस कुछ मिनट का अभ्यास ही काफी है। माइंडफुलनेस का अभ्यास शुरू में मुश्किल लग सकता है, लेकिन धीरे-धीरे इसे अपनी आदत बनाने से और प्रतिदिन 5-10 मिनट का अभ्यास भी बड़ा बदलाव ला सकता है।

माइंडफुलनेस का अर्थ है ‘अभी और यहीं’ पर फोकस करना। यह आपके दिमाग को शांत करता है और तनाव, चिंता या बेचैनी को कम करने में मदद करता है। इसे उदाहरण के तौर पर ऐसे समझ सकते हैं, मान लीजिए, आप चाय पी रहे हैं। माइंडफुलनेस का अभ्यास करने के लिए चाय की गर्मी, उसकी खुशबू और स्वाद को महसूस करें। अपने दिमाग को भटकने न दें। इससे आप शांत और तरोताजा महसूस करेंगे।

माइंडफुलनेस के एक नहीं, कई फायदे हैं। यह दिमाग को शांत करके तनाव और चिंता को कम करता है। एकाग्रता बढ़ाता है, जिससे आप अपने काम पर बेहतर ध्यान दे पाते हैं। यह आपको अपनी भावनाओं को समझने और नियंत्रित करने में मदद करता है। प्रतिदिन केवल 5-10 मिनट अभ्यास करना अच्छी नींद लाने में भी सहायक है। यही नहीं, यह रक्तचाप को नियंत्रित करने, अवसाद को कम करने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में भी मदद करता है।

अब सवाल उठता है कि माइंडफुलनेस कैसे करें? एक शांत जगह पर बैठें, आंखें बंद करें और अपनी सांसों पर ध्यान केंद्रित करें। सांस लेते और छोड़ते समय उसे महसूस करें।

जर्नल मेंटल हेल्थ एंड फिजिकल एक्टिविटी में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि जीवन में होने वाले परिवर्तन जो शारीरिक गतिविधि और जागरूकता, दोनों को जोड़ते हैं, मूड को बेहतर बनाने और स्वास्थ्य सुधार करने में सबसे प्रभावी होते हैं।

यूके में बाथ विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने कहा, “माइंडफुलनेस के साथ लोगों को व्यायाम शुरू करने के लिए प्रेरित किया जा सकता है। माइंडफुलनेस के अभ्यास से व्यायाम कठिन होने पर मामूली दर्द, परेशानी या विफलता की भावनाओं पर काबू पाया जा सकता है। व्यायाम से मिलने वाले सकारात्मक लाभों को अनलॉक करने के लिए माइंडफुलनेस फायदेमंद है।”

अमेरिका, सेंटलुइस, वाशिंगटन विश्वविद्यालय के माइंडफुलनेस साइंस एंड प्रैक्टिस रिसर्च क्लस्टर के पोस्ट डॉक्टरल रिसर्च एसोसिएट रेश गुप्ता ने बताया कि माइंडफुलनेस तकनीक का पीछे का मूल विचार बिना किसी जजमेंट या पूर्वाग्रह के मौजूदा पल पर फोकस करना होता है। यह चिंता को खत्म करने और फोकस में सुधार करने में मदद कर सकता है। कई शोध हुए और उनमें पता चला कि माइंडफुलनेस चिंता के लक्षणों को कम कर सकता है।

माइंडफुलनेस एक ऐसी तकनीक है, जो हमारी मानसिक शांति को वापस लाने के साथ ही तनाव और एंग्जाइटी से निपटने में भी बहुत मददगार है। नए शोध में पता चला है कि माइंडफुलनेस के जरिए कॉग्निटिव कंट्रोल में सुधार किया जा सकता है और इस तरह से एंग्जाइटी से निपटने में भी मदद मिलती है।

नियमित माइंडफुलनेस मेडिटेशन का अभ्यास करने वाले लोगों में चिंता के लक्षण कम होते हैं। नए शोध से पता चलता है कि ध्यान केंद्रित करने से उन लोगों को लाभ हो सकता है जो लगातार चिंता करते रहते हैं।

न्यूरोसाइंस एंड बायो बिहेवियरल रिव्यू में प्रकाशित एक पेपर में कहा, “हम सभी चिंता का अनुभव करते हैं, लेकिन यह कई अलग-अलग तरीकों से सामने आती है। इस वजह से इस समस्या का पता लगाना मुश्किल हो जाता है। सभी के लिए एक ही उपाय अपनाने के बजाय, वे सुझाव देते हैं कि अलग-अलग तरह की माइंडफुलनेस प्रैक्टिस चिंता के अलग-अलग प्रकारों से निपटने में मददगार हो सकती है।”

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