बेंगलुरु के चिन्नास्वामी स्टेडियम में 4 जून को आरसीबी की जीत के जश्न के दौरान मची भगदड़ में 11 लोगों की मौत हो गई। गुरुवार को कर्नाटक सरकार ने मृतकों की सूची जारी की। इनमें 14 साल की दिव्यांशी (येलहंका, बेंगलुरु), 26 साल की अक्षता (कारवार), 19 साल का भूमिक (बेंगलुरु), 23 साल की सहाना (कोलार), 19 साल का चिन्मय (बेंगलुरु), 20 साल के मनोजकुमार (तुमकुर), 20 साल का श्रवण (चिक्कबल्लापुर), 17 साल का शिवू (यादगीर), 20 साल का पूर्णचंद्र (मांड्या), 29 साल की कमाक्षीदेवी (तमिलनाडु) और 22 साल का प्रज्वल (बेंगलुरु) शामिल हैं।
भूमिक के पिता ने बताया कि हादसे के बाद उनके बेटे को एंबुलेंस नहीं मिली, पुलिस गाड़ी से अस्पताल ले जाया गया। सहाना के पिता ने कहा कि उन्होंने अपनी बेटी के विवाह का सपना देखा था, लेकिन अब उसकी अर्थी को माला पहना रहे हैं। प्रज्वल की मां ने सवाल उठाया कि सरकार ने उनके बेटे को खो दिया, उसका दर्द कोई कैसे समझेगा?
सरकार ने मृतकों के परिवारों को 10 लाख रुपये मुआवजा देने और मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। भाजपा ने हादसे को “सरकारी हत्या” बताते हुए मुख्यमंत्री सिद्धारमैया और डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार से इस्तीफे की मांग की है। बीजेपी प्रवक्ता ने हादसे को ‘सरकारी चूक’ का नतीजा बताया और आयोजन की अनुमति, भीड़ प्रबंधन, अतिरिक्त टिकट बिक्री पर सवाल उठाए।
हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकार से रिपोर्ट मांगी है। सोशल एक्टिविस्ट ने भी मुख्यमंत्री, डिप्टी सीएम और केएससीए के खिलाफ पुलिस में शिकायत दी है। वहीं, पुलिस ने 11 अप्राकृतिक मौत के मामले दर्ज किए हैं, लेकिन अब तक किसी पर एफआईआर नहीं हुई है।
सरकार की लापरवाही और हादसे में मारे गए लोगों के परिवारों का गुस्सा साफ झलकता है। अब सवाल उठ रहे हैं कि आखिर इस हादसे के लिए जिम्मेदार कौन है और पीड़ितों को न्याय कब मिलेगा?


