बच्चों की शिक्षा से जुड़ी मनमानी फीस, यूनिफॉर्म की मोनोपॉली और स्कूलों में हो रही प्रताड़ना जैसे मुद्दों को लेकर अब पैरेंट्स एसोसिएशन ऑफ मध्यप्रदेश ने सीधी लड़ाई का ऐलान कर दिया है। बुधवार को जबलपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में एसोसिएशन ने “पूछता है पेरेंट्स?” नामक पोस्टर अभियान की शुरुआत करते हुए सरकार और विपक्ष को कठघरे में खड़ा किया।
एसोसिएशन के अध्यक्ष सचिन गुप्ता ने कहा कि शिक्षा माफियाओं के खिलाफ अब तक जो कार्रवाइयां हुई हैं, वे सिर्फ़ कागज़ों में सिमटकर रह गई हैं। हाईकोर्ट में चल रहे मामलों में सरकार के वकीलों द्वारा जवाब तक नहीं दिया जा रहा है, जिससे यह साफ है कि सरकार इन मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है।
क्या है “पूछता है पेरेंट्स?” अभियान?
एसोसिएशन का यह पोस्टर अभियान सीधे जनता को जोड़ने का प्रयास है। अभियान के तहत पेरेंट्स अपने घरों, स्कूलों, कोचिंग संस्थानों, नेताओं के निवास और सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाकर सरकार और विपक्ष से सवाल पूछेंगे:
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कब मिलेगी शिक्षा में पारदर्शिता?
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क्यों नहीं रुकती फीस की लूट?
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यूनिफॉर्म व किताबों पर क्यों थोपे जाते हैं नियम?
सरकार और विपक्ष दोनों को घेरा
सचिन गुप्ता ने कहा कि शिक्षा के मौलिक अधिकार की रक्षा में न सरकार अपनी भूमिका निभा रही है, न विपक्ष। दोनों ही पक्षों की चुप्पी यह दर्शाती है कि वे शिक्षा के व्यवसायीकरण के सामने नतमस्तक हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द स्थिति में बदलाव नहीं आता, तो राज्यभर में आंदोलन छेड़ा जाएगा।
पैरेंट्स की सीधी भागीदारी
अभियान का मकसद पेरेंट्स को प्रत्यक्ष रूप से जागरूक और आंदोलन का हिस्सा बनाना है। आने वाले दिनों में यह पोस्टर अभियान मध्यप्रदेश के अन्य जिलों में भी पहुंचाया जाएगा।


