Jabalpur News Today – अपराध लगातार बढ़ रहे हैं, सवाल उठ रहे हैं जांच और सजा पर
प्रदेश में महिलाओं और नाबालिगों के खिलाफ अपराधों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे मामलों में सख्त सजा और निष्पक्ष जांच की मांग उठती रही है, लेकिन हाल ही में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के एक फैसले ने नई बहस को जन्म दे दिया है।
घटना: आरोपी को पहले मिली थी उम्रकैद
यह मामला सिंगरौली जिले का है, जहां विंदोस राव नामक व्यक्ति पर नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप लगा था। विशेष पॉक्सो अदालत ने 11 सितंबर 2023 को उसे उम्रकैद की सजा सुनाई थी। आरोपी की ओर से अधिवक्ता महेश प्रसाद शुक्ला ने हाईकोर्ट में अपील दाखिल की और सजा को चुनौती दी।
नानी का बयान बना फैसले का आधार
सुनवाई के दौरान पीड़िता की नानी ने अदालत को बताया कि उसने पुलिस के दबाव में आकर आरोपी के खिलाफ बयान दिया था। साथ ही, मेडिकल रिपोर्ट में भी पीड़िता के शरीर पर चोट या बल प्रयोग के कोई निशान नहीं पाए गए। ये दोनों तथ्य कोर्ट के फैसले में अहम साबित हुए।
पुलिस जांच और कोर्ट की टिप्पणी
जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने कहा कि इस मामले में प्रस्तुत साक्ष्य दुष्कर्म की पुष्टि नहीं करते, बल्कि यह पॉक्सो एक्ट की धारा-7 (यौन शोषण) के अंतर्गत आता है। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में साक्ष्यों की गहराई से जांच अत्यंत आवश्यक है। इसी आधार पर आरोपी की उम्रकैद को घटाकर 4 साल के साधारण कारावास में बदल दिया गया।
यह फैसला जहां एक ओर कानून की प्रक्रिया पर भरोसे को दिखाता है, वहीं दूसरी ओर पुलिस जांच की निष्पक्षता और पीड़िता की सुरक्षा व न्याय को लेकर कई गंभीर सवाल भी खड़े करता है।


