जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने उर्दू शिक्षक के ट्रांसफर विवाद में बड़ा निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि उर्दू विषय पढ़ाने वाले शिक्षक को वहीं पदस्थ किया जाए जहां उर्दू विषय का स्वीकृत पद और विद्यार्थी दोनों मौजूद हों। इसके साथ ही, ट्रांसफर के खिलाफ किए गए अभ्यावेदन का निराकरण 30 दिन के भीतर करने के आदेश भी दिए गए हैं।
यह फैसला न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने आजाद चौक, कटनी निवासी शिक्षक इलियास अहमद की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता शंकर प्रसाद सिंह और पद्मावती जायसवाल ने पक्ष रखा।
क्या है पूरा मामला?
इलियास अहमद की नियुक्ति उर्दू विषय के शिक्षक के रूप में शासकीय माध्यमिक शाला, खमरिया नंबर-दो (कटनी) में हुई थी। लेकिन बाद में जिला शिक्षा अधिकारी ने उनका ट्रांसफर प्राथमिक शाला कोठी, ढीमरखेड़ा में कर दिया — जहां न तो उर्दू विषय का कोई पद स्वीकृत है और न ही कोई छात्र उर्दू पढ़ता है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी और निर्देश
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नियुक्ति जब उर्दू जैसे विशिष्ट विषय के लिए हुई हो, तो शिक्षक को ऐसे स्कूल में भेजना जहां वह विषय पढ़ाया ही नहीं जाता, शैक्षिक हितों के खिलाफ है।
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यह न केवल व्यवहारिक रूप से अनुचित है बल्कि शिक्षा व्यवस्था के साथ अन्याय भी है।
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अतः, शिक्षक को उसी स्कूल में कार्य करने दिया जाए जहां उर्दू का विषय और पद दोनों उपलब्ध हों।
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ट्रांसफर के खिलाफ अभ्यावेदन का निराकरण 30 दिनों में किया जाए।


