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September 6, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

जबलपुर – एसपी के खिलाफ वकीलों ने की नारेबाजी, अधिवक्ता और बेटे पर जानलेवा हमले से थे आक्रोशित

वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज शिवहरे और उनके बेटे शिवांक शिवहरे पर हुए हमले से नाराज़ वकीलों ने गुरुवार को जबलपुर जिला न्यायालय में कामकाज बंद कर जोरदार प्रदर्शन किया। वकीलों ने मानव श्रृंखला बनाकर विरोध जताया और पुलिस अधीक्षक सम्पत उपाध्याय के इस्तीफे की मांग करते हुए नारेबाजी की।

72 घंटे बाद भी आरोपी गिरफ्तार नहीं

जिला सत्र न्यायालय अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष मनीष मिश्रा ने बताया कि हमले के बाद अधिवक्ताओं ने प्रशासन को 24 घंटे में गिरफ्तारी की चेतावनी दी थी, लेकिन 72 घंटे बीत जाने के बाद भी एक भी आरोपी गिरफ्त में नहीं आया। वकीलों का आरोप है कि पुलिस की लापरवाही के चलते आरोपियों को भागने का पूरा मौका मिला

मनीष मिश्रा ने चेतावनी दी कि यदि जल्द गिरफ्तारी नहीं होती, तो अधिवक्ता सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे और कानूनी कार्य से विरत रहेंगे।

क्या है पूरा मामला?

घटना थाना लार्डगंज क्षेत्र की है। अधिवक्ता मनोज शिवहरे का “सिल्वर हाउस” शोरूम सुपर मार्केट में निर्माणाधीन है।
20 जुलाई की रात करीब 9 बजे, “सुहागन आभूषण” के संचालक गोलू उर्फ ऋषि अग्रवाल ने उन्हें फोन पर बताया कि एक युवक आदित्य दिवाकर उनकी दुकान से दो जेवरों के डिब्बे उठा ले गया है।

बातचीत के बाद आदित्य के पिता जितेंद्र जैन ने डिब्बे वापस करवा दिए, लेकिन इसी बात को लेकर गोलू और जितेंद्र के बीच विवाद हो गया। इसके बाद पवन चौधरी और नन्नू जैन भी वहां पहुंचे और सभी शोरूम की ऊपरी मंजिल पर चले गए।

कुछ देर में फोन कर गगन यादव, साहिल यादव, शुभम सोनी और अन्य 10–12 युवकों को बुलाया गया, जो जबरन ऊपर घुस आए। शिवांक शिवहरे ने जब उन्हें बाहर निकलने को कहा, तो विवाद और बढ़ गया। नन्नू जैन ने शिवांक का गला पकड़ लिया और गालियां देने लगा।

नीचे आकर नन्नू और पवन ने शिवांक को पकड़ लिया और कहा – “ऊपर बहुत उड़ रहा था”, फिर सबने मिलकर उस पर चाकू से हमला कर दिया। उसकी दोनों जांघों में गंभीर चोटें आईं। बीच-बचाव करने आए अधिवक्ता मनोज शिवहरे भी घायल हो गए।

पुलिस की कार्रवाई

घटना को गंभीरता से लेते हुए एसपी सम्पत उपाध्याय ने जांच के निर्देश दिए हैं।
एएसपी आनंद कलादगी, सीएसपी रीतेश शिव और थाना प्रभारी नवल सिंह आर्य की टीम आरोपियों की तलाश में जुटी है।

शिवांक शिवहरे को विक्टोरिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
पुलिस ने BNS की धारा 296, 191(2)(3), 333, 324(4), 109, 351(2) के तहत केस दर्ज किया है।

अधिवक्ताओं की चेतावनी

प्रदर्शन कर रहे वकीलों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि यदि आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी नहीं होती, तो वे न्यायालय परिसर से बाहर निकलकर सड़क पर उग्र आंदोलन करेंगे।
उन्होंने पुलिस अधीक्षक को निष्क्रिय बताते हुए उनके इस्तीफे की मांग की और कहा कि, “प्रशासनिक लापरवाही के चलते अपराधियों के हौसले बुलंद हैं और अब वकीलों की सुरक्षा पर भी सवाल उठने लगे हैं।”

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