May 28, 2026
सी टाइम्स
क्राइमप्रादेशिक

भोपाल – नौ बच्चों की मौत के बाद मध्यप्रदेश में खांसी की सिरप बैन, तमिलनाडु सरकार से जांच की मांग

Following nine paediatric deaths; MP bans lethal cough syrups, urge TN govt to initiate probe

भोपाल, 4 अक्टूबर। मध्यप्रदेश सरकार ने छिंदवाड़ा ज़िले में नौ बच्चों की मौत के बाद राज्यभर में एक कथित “घातक” खांसी की सिरप पर प्रतिबंध लगा दिया है। इसके साथ ही संबंधित दवा निर्माता कंपनी के अन्य उत्पादों की बिक्री पर भी रोक लगा दी गई है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बताया कि यह सिरप कांचीपुरम (तमिलनाडु) की एक दवा निर्माण इकाई में तैयार किया गया था। उन्होंने कहा कि इस मामले की जांच के लिए तमिलनाडु सरकार से अनुरोध किया गया था और जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद कड़ी कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री ने शनिवार को अपने एक्स (X) अकाउंट पर लिखा, “छिंदवाड़ा में Coldrif सिरप से बच्चों की हुई मौतें अत्यंत दुखद हैं। इस सिरप की बिक्री पर पूरे प्रदेश में प्रतिबंध लगाया गया है। संबंधित कंपनी के अन्य उत्पादों की बिक्री भी बंद की गई है। सिरप बनाने वाली फैक्ट्री कांचीपुरम में है। तमिलनाडु सरकार से जांच का आग्रह किया गया था। आज जांच रिपोर्ट प्राप्त हुई है और रिपोर्ट के आधार पर सख्त कार्रवाई की गई है।”

उन्होंने आगे कहा, “बच्चों की मौत के बाद स्थानीय स्तर पर कार्रवाई शुरू कर दी गई थी। राज्य स्तर पर भी जांच के लिए टीम गठित की गई है। दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”

मामला क्या है?

24 अगस्त से 2 अक्टूबर के बीच छिंदवाड़ा ज़िले में 9 बच्चों की मौत हुई, जिनके बारे में आशंका जताई जा रही है कि ये मौतें दूषित खांसी की सिरप के सेवन से हुई किडनी फेल्योर (गुर्दा फेल होने) के कारण हुईं।

बच्चों में शुरुआत में सर्दी, खांसी और बुखार के लक्षण दिखाई दिए, जो बाद में तेजी से गुर्दे की जटिलताओं में बदल गए।

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, जांच के दायरे में आए सिरप Coldrif और Nextro DS हैं, जिन्हें जबलपुर स्थित एक दवा इकाई से वितरित किया गया था। कुल 660 बोतलों में से 594 बोतलें छिंदवाड़ा के तीन वितरकों को भेजी गई थीं, जबकि शेष स्टॉक को सील कर दिया गया है।

प्रारंभिक जांच में सिरप में ब्रेक ऑयल सॉल्वेंट (Brake Oil Solvent) जैसी अत्यधिक विषैली रासायनिक मिलावट की संभावना जताई गई है।

निगरानी और जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष प्रोटोकॉल लागू किया गया है। इसके तहत जो बच्चे दो दिन से अधिक बीमार हैं, उन्हें पहले सिविल अस्पताल में छह घंटे तक निगरानी में रखा जाएगा, और ज़रूरत पड़ने पर ज़िला अस्पताल भेजा जाएगा।

अब तक 1,420 से अधिक बच्चों को फ्लू जैसे लक्षणों के कारण निगरानी में रखा गया है। आशा कार्यकर्ता घर-घर जाकर डिस्चार्ज हुए मरीजों की निगरानी कर रही हैं।

सिरप, पानी और प्रभावित बच्चों के मानव ऊतक नमूने जांच के लिए पुणे और दिल्ली की प्रयोगशालाओं में भेजे गए हैं।

अन्य राज्यों में भी सतर्कता

राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (RMSCL) ने भी 19 बैच सिरप पर प्रतिबंध लगाया है, जब सीकर और भरतपुर में दो बच्चों की मौत हुई थी।

निजी डॉक्टरों को निर्देश दिया गया है कि वे वायरल केसों को सरकारी अस्पतालों में रेफर करें।

विपक्ष का आरोप

पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ, जो छिंदवाड़ा से हैं, ने राज्य सरकार पर लापरवाही का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सिरप में वाहनों में उपयोग होने वाला ब्रेक ऑयल मिलाया गया था, और मांग की कि इस तरह की सभी उत्पादों पर पूरे राज्य में प्रतिबंध लगाया जाए।

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