*शहडोल।* पंडित अटल बिहारी वाजपेई शासकीय महाविद्यालय जयसिंहनगर जिला शहडोल म. प्र. में दिनांक 25 फरवरी 2026 को उच्च शिक्षा विभाग मध्य प्रदेश के आदेशानुसार पी.एम. ऊषा द्वारा प्रायोजित, इतिहास विभाग द्वारा एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी जिसका “समग्र विकास के लिए ज्ञान, विज्ञान और संस्कार का संकलन” पर भव्य आयोजन महाविद्यालय के ऊर्जावान प्राचार्य डॉ. धर्मेंद्र कुमार द्विवेदी जी के कुशल मार्गदर्शन में एवं इतिहास विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. शुभांगी गुप्ता के सार्थक प्रयास से किया गया। एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी की अध्यक्षता कर रहे महाविद्यालय के प्राचार्य एवं मुख्य अतिथि,मुख्य वक्ता, विशिष्ट वक्ता एवं पी.एम. ऊषा प्रभारी द्वारा मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। छात्राओं द्वारा सरस्वती वंदना एवं स्वागत गीत की मोहक प्रस्तुति की गई। आज की राष्ट्रीय संगोष्ठी प्रोफेसर आर. पी. सिंह मुख्य संरक्षक एवं अतिरिक्त संचालक रीवा के संरक्षण में आयोजित की गई। आमंत्रित अतिथियों का पुष्प गुच्छ, बैज, स्मृति चिन्ह एवं शाल श्रीफल से स्वागत किया गया। महाविद्यालय के प्राचार्य द्वारा स्वागत उद्बोधन एवं आशीर्वचन प्रदान करते हुए कार्यशाला के सफलता की शुभकामना प्रेषित की गई, साथ ही इतिहास विभाग से श्री विवेक पाठक द्वारा विषय पर प्रकाश डाला गया। आज के कार्यक्रम में मुख्य वक्ता डॉ. शिवानंद त्रिपाठी, सह प्राध्यापक एवं विभागाध्यक्ष प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व विभाग इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विश्व विद्यालय अमरकंटक सादर आमंत्रित रहे I हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ अर्चना जायसवाल जी ने डॉ त्रिपाठी के परिचय का वाचन किया। व्याख्यान से पूर्व कार्यक्रम का शुभारंभ वंदे मातरम गीत का गायन कर किया गया।
डॉ. त्रिपाठी ने अपने व्याख्यान में भारत के प्राचीन शिक्षा पद्धति , उसकी समृद्धि, और पाश्चात्य जगत द्वारा उस शिक्षा पद्धति किए गए बदलाव की समीक्षा विविध उदाहरण देते हुए ऐसे वातावरण का निर्माण करने पर बल दिया एवं पाश्चात्य शिक्षाविद विलियम जोन्स एवं लॉर्ड मैकाले द्वारा भारतीय शिक्षा पर विचार की बात कहीं तथा सभी छात्र/छात्राओं एवं उपस्थित जनों को इनके प्रभाव से अवगत कराया ।इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रो मुकेश तिवारी जी पूर्व कुल गुरु एवं प्राचार्य शासकीय इंदिरा गांधी गृह विज्ञान महाविद्यालय शहडोल (म.प्र.) सादर आमंत्रित थे I श्री विवेक पाठक विभाग इतिहास द्वारा प्रो तिवारी जी के परिचय का वाचन किया गया । डॉ तिवारी जी अपने वक्तव्य में शैक्षणिक संस्थान एवं भारतीय ज्ञान परंपरा को स्मरण करते हुए वर्तमान शिक्षा में इसके अंतर्संबंध पर प्रकाश डाला ।साथ ही प्रो तिवारी जी परिवार, कुटुंब को भारत की आधार भूत आवश्यकता कहा। तथा राष्ट्र निर्माण के शिक्षकों भूमिका पर प्रकाश डाला । संगोष्ठी के विशिष्ट वक्ता प्रो रामकिंकर पाण्डेय प्राचार्य शासकीय नवीन महाविद्यालय चिरमिरी (छ. ग़) के परिचय का वाचन इतिहास विभाग की सुश्री आकांक्षा गौतम ने किया । डॉ. पांडेय जी अपने वक्तव्य में मध्यकालीन भारतीय इतिहास के पन्नों की समीक्षा किया तथा बाह्य देशों से आए इतिहासकार एवं यात्रियों के भारत विषयक विचारों पर प्रकाश डाला तथा सामाजिक परिवेश में समरसता पूर्ण वातावरण, अपने पौराणिक जीवन शैली, अतीत के जड़ों से जुड़ाव की बात की । । इस संगोष्ठी में में मुख्य अतिथि के रूप में विविध महाविद्यालयों से आए प्राध्यापक डॉ भूपेंद्र सिंह, प्रो बी.के सिंह डॉ विनोद सुनार, डॉ कुंती साहू , डॉ यमुना सिंह धुर्वे, डॉ नरहरी मिश्रा, डॉ अनुराग सोनी,श्री राजमणि नापित,डॉ मूल चंद्र साहू जी सादर आमंत्रित रहे।
अतिथियों के व्याख्यान उपरांत सभी अधिकारी/कर्मचारी/प्रतिभागियों को सम्माननीय अतिथियों एवं प्राचार्य महोदय द्वारा स्मृति चिन्ह एवं प्रमाण पत्र प्रदान किया गया । कार्यक्रम का सफल मंच संचालन इस कार्यक्रम की संयोजक एवं इतिहास विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. शुभांगी गुप्ता एवं विवेक पाठक ने संयुक्त रूप से किया एवं पी एम उषा प्रभारी प्रो गजेंद्र परतें जी द्वारा आभार ज्ञापित किया गया।संगोष्ठी में दिए गए अतिथि व्याख्यान के प्रतिवेदन का कार्य डॉ प्रीति रजक,श्री भागवत राज, डॉ. रागनी गुप्ता ने किया। महाविद्यालय के प्राध्यापक डॉ लवकुश दीपेंद्र, श्री उत्तम सिंह, डॉ प्रमिला वास्केल,डॉ यदुवीर मिश्रा,डॉ दिलीप शुक्ला, डॉ मुनौवर अली, श्री आदित्य शुक्ला, जीतेंद्र साकेत सहित समस्त अधिकारी कर्मचारी बाहर से आए हुए शोधार्थी एवं समस्त छात्र छात्रा सम्मिलित हुए। इस आयोजन में महाविद्यालय के समस्त अधिकारी/कर्मचारियों का सराहनीय योगदान रहा । सभी के द्वारा राष्ट्र गान करके महा विद्यालय प्राचार्य के आदेशानुसार कार्यक्रम के समापन की औपचारिक घोषणा की गई।


