अनूपपुर। जिले में पिछले 111 दिनों से जंगली हाथियों का आतंक लगातार बना हुआ है। चार हाथियों का एक दल जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में घूमकर किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचा रहा है और कई स्थानों पर मकानों को भी क्षतिग्रस्त कर चुका है। इस कारण ग्रामीणों में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। स्थिति सोमवार और मंगलवार की दरमियानी रात उस समय और गंभीर हो गई, जब तीन जंगली हाथी अचानक जैतहरी नगर के रिहायशी इलाके में घुस आए। रात करीब 10 बजे हाथियों के बाजार, बस स्टैंड और होटलों के पास पहुंचने से इलाके में हड़कंप मच गया। लोग घरों से बाहर निकल आए और कुछ समय के लिए भगदड़ जैसे हालात बन गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तीनों हाथी काफी देर तक बाजार क्षेत्र में घूमते रहे। स्थानीय लोगों ने शोर मचाकर और अन्य तरीकों से हाथियों को भगाने की कोशिश की, लेकिन हाथी बार-बार उसी दिशा में लौट आते थे। इससे लोगों की दहशत और बढ़ गई।
प्रशासन और ग्रामीणों की मदद से खदेड़े गए हाथी
सूचना मिलने पर पुलिस और वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। स्थानीय लोगों के सहयोग से काफी प्रयासों के बाद हाथियों को रिहायशी क्षेत्र से बाहर खदेड़ा गया। हालांकि, इस दौरान कोई जनहानि की सूचना नहीं है, लेकिन लोगों में डर का माहौल बना हुआ है।
जंगल में डेरा, एक हाथी अलग
मंगलवार सुबह मिली जानकारी के अनुसार, तीन हाथी धनगवां बीट के जंगल में डेरा डाले हुए हैं, जबकि एक अन्य हाथी पोड़ी बीट के जंगल में अलग मौजूद है। वन विभाग लगातार इनकी गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है।
प्रशासन अलर्ट, लोगों से सतर्क रहने की अपील
हाथियों के शहरी क्षेत्र में प्रवेश के बाद प्रशासन और वन विभाग अलर्ट मोड पर आ गए हैं। गश्ती दल तैनात कर दिए गए हैं और लगातार निगरानी की जा रही है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे रात के समय घरों से बाहर न निकलें, हाथियों के पास जाने की कोशिश न करें और किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सूचना दें।
लगातार बढ़ रही चुनौती
जिले में लंबे समय से सक्रिय हाथियों का यह दल प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। वन विभाग के सामने अब सबसे बड़ी जिम्मेदारी हाथियों को सुरक्षित तरीके से जंगल में ही रोकने और ग्रामीणों को नुकसान से बचाने की है।


