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April 22, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

चुनाव आयोग ने पीठासीन अधिकारियों को ईवीएम के उपयोग में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया



नई दिल्ली, 21 अप्रैल  भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने सभी मतदान केंद्रों पर पीठासीन अधिकारियों को इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) के इस्तेमाल में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हैं।

आयोग के सूत्रों ने इस बात पर जोर दिया कि पीठासीन अधिकारियों को यह जांच और पुष्टि अवश्य करनी चाहिए कि बैलेट यूनिट पर उम्मीदवारों के सभी बटन स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं और उनमें कोई रुकावट नहीं है। किसी भी बटन को टेप, गोंद या किसी अन्य सामग्री से नहीं ढका जाना चाहिए, जिससे मतदान प्रक्रिया में बाधा उत्पन्न हो सकती हो।

आयोग ने साफ तौर पर कहा है कि बैलेट यूनिट के कैंडिडेट बटन पर कोई रंग, स्याही, परफ्यूम या कोई भी केमिकल नहीं लगाया जा सकता, क्योंकि ऐसी हरकतों से वोटों की सीक्रेसी से समझौता हो सकता है।

पीठासीन अधिकारियों को सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध एक्टिविटी या गड़बड़ी की तुरंत सेक्टर ऑफिसर या रिटर्निंग ऑफिसर को रिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है।

ईसीआई सूत्रों के अनुसार, ईवीएम के कामकाज में किसी भी तरह की छेड़छाड़ या हस्तक्षेप करने के प्रयास को चुनावी अपराध माना जाएगा।

आयोग ने यह स्पष्ट कर दिया है कि ऐसे कृत्यों के लिए दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध आपराधिक कार्यवाही शुरू करने में वह जरा भी संकोच नहीं करेंगे। इसके अलावा, आयोग ने यह चेतावनी भी दी है कि जिन मामलों में छेड़छाड़ का पता चलेगा, वहां पुनर्मतदान का आदेश दिया जा सकता है। इस प्रकार चुनावी प्रक्रिया की पवित्रता को बनाए रखा जाएगा।

यह ताजा निर्देश पूरे देश में स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के प्रति आयोग की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। चूंकि वोटिंग मशीनें भारत की चुनावी प्रणाली की रीढ़ हैं, इसलिए ईसीआई ने एक बार फिर दोहराया है कि छोटी-मोटी अनियमितताओं को भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

इन निर्देशों का मकसद चुनावी प्रक्रिया में जनता का भरोसा मजबूत करना और यह पक्का करना है कि डाला गया हर वोट गुप्त, सुरक्षित और सही-सही दर्ज हो।

पीठासीन अधिकारियों पर जवाबदेही तय करके आयोग ने गलत कामों के खिलाफ बचाव की पहली पंक्ति को मजबूत करने की कोशिश की है। यह कदम ऐसे अहम समय पर आया है, जब राजनीतिक पार्टियां और वोटर, दोनों ही चुनावों में ज्यादा पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।

ईसीआई का यह कड़ा रुख लोकतांत्रिक मूल्यों को बनाए रखने और भारत की चुनावी मशीनरी की विश्वसनीयता की रक्षा करने के उसके पक्के इरादे का संकेत है।

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