जबलपुर। महगवां-परियट स्थित राजुल एस्टेट एक बार फिर विवादों में घिर गया है। कॉलोनी के रहवासियों ने कॉलोनाइजर दिलीप मेहता पर टीएनसीपी (टाउन एंड कंट्री प्लानिंग) से स्वीकृत नक्शे के विपरीत प्लॉटिंग करने, ले-आउट में बदलाव करने और सार्वजनिक उपयोग की जमीन बेचने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
रहवासियों के अनुसार, स्वीकृत नक्शे में जिन प्लॉट्स की दिशा दक्षिण दर्शाई गई थी, उन्हें मौके पर पूर्व दिशा में विकसित कर बेचा गया। यह बदलाव नियमों के विरुद्ध बताते हुए लोगों ने इसे सुनियोजित हेरफेर करार दिया है।
सबसे गंभीर आरोप कॉलोनी की सड़क को बेचने का है। रहवासियों का कहना है कि स्वीकृत ले-आउट में आवागमन के लिए सुरक्षित रखी गई सड़क को कॉलोनाइजर ने अवैध रूप से भूखंड बताकर बेच दिया। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन हुआ, बल्कि भविष्य में यहां रहने वालों के लिए बुनियादी सुविधाओं पर भी संकट खड़ा हो सकता है।
इसके अलावा, स्कूल के लिए आरक्षित भूमि पर भी अतिक्रमण की आशंका जताई जा रही है। आरोप है कि प्लॉट नंबर 1, 2 और 3 के पास स्कूल के लिए छोड़ी गई जमीन के समीप की सड़क को भी बेच दिया गया, जिससे सार्वजनिक उपयोग की भूमि प्रभावित हो रही है।
राजुल एस्टेट रहवासी समिति के अध्यक्ष विकास पांडे ने कहा कि कॉलोनाइजर ने अधिक मुनाफा कमाने के लालच में न सिर्फ सरकारी नियमों की अनदेखी की, बल्कि खरीदारों के साथ भी विश्वासघात किया है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मौके का निरीक्षण कर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
रहवासियों का कहना है कि कागजों में किए गए वादे और जमीन पर हकीकत में बड़ा अंतर सामने आ रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो वे कानूनी कदम उठाने को मजबूर होंगे।


