November 2, 2026
सी टाइम्स
प्रादेशिक

इंजी. संतोष कुमार मिश्र “असाधु” द्वारा “रामायण काल में सशक्त नारी” विषय पर शोध पत्र प्रस्तुत

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” इस ब्रह्मांड में केवल ईश्वर ही पुरुष तथा प्रकृति और इसकी सारी संरचनाएं नारी वर्ग के अंतर्गत हैं …. असाधु ! “नई दिल्ली/जबलपुर, भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद(आईसीपीआर) एवं
श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय, दिल्ली यूनीवर्सिटी 
के संयुक्त तत्वाधान में  दिनांक 23 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली में “नारी सशक्तिकरण -विकसित भारत” विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित किए गए एक दिवसीय कॉन्फ्रेंस में रामायण केंद्र जबलपुर इकाई के संयोजक इंजी . संतोष कुमार मिश्र “असाधु” ने “रामायण काल में सशक्त नारी ” उप-विषय पर  एक अत्यंत रोचक शोध पत्र प्रस्तुत किया गया । राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 89 शोध पत्र प्राप्त हुए हैं।  अपने संबोधन में रामायण केंद्र जबलपुर इकाई के संयोजक एवं प्रसिद्ध धार्मिक चिंतक इंजी. संतोष कुमार मिश्र “असाधु ” जोकि वर्तमान में मध्य प्रदेश पॉवर मैनेजमेंट कंपनी लिमिटेड जबलपुर में अधीक्षण अभियंता के पद पर कार्यरत हैं,के द्वारा बताया गया कि रामायण काल में संस्कार-दात्री नारी की वास्तविक शक्ति उनमें नारीत्व का भाव और पतिव्रत धर्म का पालन किया जाना था वहीं धैर्य ,लज्जा, क्षमा, श्रद्धा,करुणा और त्याग-तपस्या आदि नारी के आभूषण हुआ करते थे जिसकी वजह से ही हमारा यह गौरवशाली देश पूरी दुनियां में अग्रणी था। वर्तमान समय के परिप्रेक्ष्य में श्री मिश्र ने बताया कि नारियों में पुरुषत्व भाव का होना नारियों की दुर्बलता का संकेत है। वर्तमान समय मे नारी सशक्तिकरण के नाम पर पाश्चात्य सभ्यता का जिस ढंग से अंधानुकरण किया जा रहा है साथ ही विभिन्न एनजीओ  और इंटरनेट तथा सोशल मीडिया के द्वारा द्वारा इसके आड़ में जो हमारी भारतीय परंपरा और संस्कृति को विनष्ट करने का षड्यंत्रपूर्ण जो प्रयास किया जा रह है, वह गहन चिंता का विषय है। उन्होंने बताया कि तुलसीदास जी द्वारा रचित श्रीरामचरितमानस  ग्रंथ एक अत्यंत गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों से परिपूर्ण ग्रंथ है जिसमें गोस्वामी तुलसीदास जी ने बहुत से स्थानों में जिस नारी की निन्दा करते हुए दिखाई देते हैं वो वस्तुतः ईश्वर की माया रूपी प्रकृति का संकेत है ।  उन्होंने बताया कि यदि हम गोस्वामी तुलसीदास जी के दृष्टि के आधार पर देखें तो इस प्रकृति के स्त्री ,पुरुष और सभी संरचनाएं नारी वर्ग के अंतर्गत ही आते है। श्री मिश्र ने अपने इस शोध पत्र में रामचरितमानस के अंतर्गत नारियों को भले ही कोमलांगी कहा है तथापि उनके मानसिक संकल्प को अत्यंत दृढ़ दर्शाया है। हमारे समाज में रामायण काल में नारियों को पुरुष से अधिक सम्मान और शक्तियां प्राप्त थीं। इसके अतिरिक्त श्रीरामचरितमानस के अंतर्गत नारियों के सम्बन्ध में और भी कई गूढ़ विषयों का रहस्योद्घाटन किया गया। श्री मिश्र के इस अनूठे शोध पत्र की भूरि-भूरि प्रशंसा करते हुए उन्हें पश्चिमी दिल्ली की बीजेपी सांसद श्रीमती कमलजीत सेहरावत द्वारा सम्मानित किया गया है। श्री मिश्र द्वारा जन जागृति की दिशा में इस तरह के अभिनव कार्य करते हुए संस्कारधानी जबलपुर का नाम राष्ट्रीय क्षितिज पर पुनः गौरवान्वित किया है।
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