पीपीपी मोड बना मरीजों और परिजनों की परेशानी का सबब
जबलपुर। जबलपुर रेल मंडल के अंतर्गत आने वाले रेलवे अस्पतालों और डिस्पेंसरियों की सफाई व्यवस्था में अब तक कोई ठोस सुधार नजर नहीं आ रहा है। मरीजों के परिजन, रेल कर्मचारी और श्रमिक संगठनों का आरोप है कि पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के कारण व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है और इसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
हाल ही में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर रेल प्रशासन ने सख्त कदम उठाते हुए लखनऊ की मेसर्स आर.एन. इंडस्ट्रीज का ठेका तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया था। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अशोक कुमार द्वारा जारी आदेश में कंपनी को दो वर्षों के लिए जबलपुर रेल मंडल में किसी भी कार्य से प्रतिबंधित कर दिया गया था। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर सफाई व्यवस्था में कोई खास सुधार नहीं दिख रहा है।
रेलवे अस्पताल, डिस्पेंसरियों और कॉलोनियों की स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। कार्रवाई के बाद कुछ समय के लिए ठेकेदारों में हड़कंप जरूर मचा, लेकिन धीरे-धीरे लापरवाही फिर से सामने आने लगी है।
मेसर्स आर.एन. इंडस्ट्रीज के पास जबलपुर रेल मंडल के चिकित्सा विभाग के अंतर्गत आने वाले कई महत्वपूर्ण स्थानों की सफाई का जिम्मा था। इसमें रेलवे अस्पताल, विभिन्न डिस्पेंसरियां, आधा दर्जन से अधिक प्रमुख रेलवे स्टेशन, साथ ही रेल सौरभ कॉलोनी और बजरंग कॉलोनी जैसी आवासीय बस्तियां शामिल थीं। अनुबंध के तहत नियमित सफाई सुनिश्चित करना कंपनी की जिम्मेदारी थी, लेकिन शुरुआत से ही काम संतोषजनक नहीं पाया गया।
कंपनी की कार्यशैली को लेकर लगातार शिकायतें सामने आ रही थीं। स्टेशनों और कॉलोनियों में कचरे के ढेर, अस्पताल परिसरों में गंदगी जैसी समस्याएं लगातार अधिकारियों तक पहुंचती रहीं। प्रशासन ने समय-समय पर नोटिस जारी कर सुधार के निर्देश दिए, लेकिन कंपनी ने इन पर गंभीरता नहीं दिखाई। अंततः लगातार गिरते स्वच्छता स्तर को देखते हुए ठेका समाप्त करने का निर्णय लिया गया।
सफाई व्यवस्था में लापरवाही के अलावा कर्मचारियों के हितों की अनदेखी भी कार्रवाई का प्रमुख कारण रही। जांच में सामने आया कि कंपनी कर्मचारियों को समय पर वेतन नहीं दे रही थी और न ही भविष्य निधि (पीएफ) जमा कर रही थी। इससे नाराज कर्मचारियों ने कई बार काम बंद कर हड़ताल की, जिसके चलते सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई।
रेल प्रशासन की कार्रवाई के बावजूद हालात जस के तस बने हुए हैं। अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में स्वच्छता का अभाव मरीजों के लिए गंभीर परेशानी का कारण बन रहा है। अब जरूरत इस बात की है कि रेलवे प्रशासन स्थायी और प्रभावी समाधान निकालकर व्यवस्था को पटरी पर लाए, ताकि मरीजों और कर्मचारियों को राहत मिल सके।


