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April 29, 2026
सी टाइम्स
अंतरराष्ट्रीय

हिजबुल्लाह के खतरों पर नेतन्याहू की चेतावनी, 122 मिमी रॉकेट और ड्रोन अब भी चुनौती



नई द‍िल्‍ली, 27 अप्रैल )। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने आईडीएफ के वरिष्ठ कमांडरों के साथ एक बैठक में हिस्सा लिया। उन्होंने लेबनान में सुरक्षा स्थिति, चल रहे सैन्य अभियानों और हिजबुल्लाह से जुड़े खतरों पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने सेना की कार्रवाई की सराहना की।



प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने अपने भाषण में कहा क‍ि लेबनान में हमने बहुत बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं। हमने उस रॉकेट सिस्टम को खत्म कर दिया है, जो पूरे देश के लिए खतरा था। हमने एक सुरक्षा क्षेत्र बनाया है जो उत्तरी इजरायल में घुसपैठ को रोकता है और अब एंटी-टैंक मिसाइल हमलों को भी रोकता है। साथ ही यह हमें लेबनान में हालात बदलने की भी क्षमता देता है।

हम अभी भी कार्रवाई कर रहे हैं। हमारे पास तुरंत और उभरते खतरों को रोकने की पूरी आजादी है। यह वही समझौता है जो हमने अमेरिका और लेबनानी सरकार के साथ किया है।

नेतन्याहू ने कहा क‍ि मैं यह भ्रम में नहीं हूं कि यह आसान होगा, और मैं ईमानदारी से कहूं तो मुझे नहीं लगता कि काम पूरा हो गया है। लेबनान में हिजबुल्लाह से अभी भी दो बड़े खतरे बाकी हैं: 122 मिमी रॉकेटों का खतरा और ड्रोन और यूएवी का खतरा।

इसके लिए हमें सैन्य और तकनीकी दोनों तरह की कोशिशों को मिलाकर काम करना होगा। रक्षा मंत्री और चीफ ऑफ स्टाफ यह अच्छी तरह जानते हैं। हम इन समस्याओं को हल करने के लिए बहुत बड़ा तकनीकी प्रयास कर रहे हैं।

अगर हम इन्हें सैन्य और तकनीकी तरीके से हल कर लेते हैं, तो हम असल में हिजबुल्लाह को निरस्त्र करने की दिशा में बढ़ जाएंगे, क्योंकि यही उनका मुख्य हथियार है। अब उनके पास लगभग 10 प्रत‍िशत मिसाइलें ही बची हैं, जितनी उनके पास युद्ध की शुरुआत में थीं। ये अभी भी उत्तरी इलाकों के लोगों के लिए परेशानी का कारण हैं, और मैं उनकी हिम्मत और मजबूती की बहुत सराहना करता हूं।

हमारे सामने अभी भी दो काम बाकी हैं। मैं आपसे उम्मीद करता हूं कि आप इन दो समस्याओं को हल करेंगे, क्योंकि मेरा मानना है कि अगर हम सैन्य और तकनीकी पहलू सुलझा लेते हैं, तो कूटनीतिक पहलू भी अपने आप हल हो सकता है।

इससे पहले भी पीएम नेतन्याहू ने आईडीएफ सैनिकों की सराहना करते हुए कहा, “मैंने उनकी निजी कहानियां सुनीं। उनकी प्रतिबद्धता, उनका त्याग और उन्होंने जो रास्ता चुना। मैं बहुत प्रभावित हुआ। इजरायल मिडिल ईस्ट का एकमात्र ऐसा देश है जहां ईसाई समुदाय न केवल सुरक्षित रहता है, बल्कि फलता-फूलता है, बढ़ता है और सफल होता है। मैं आपको सलाम करता हूं। आपकी सेवा, आपकी हिम्मत और इजरायल देश के लिए आपके जबरदस्त योगदान के लिए धन्यवाद।”

बता दें कि ईसा मसीह की मूर्ति तोड़ने के मामले में विदेश मंत्री गिडियन सार को माफी मांगनी पड़ी। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्होंने लिखा, “मुझे भरोसा है कि जिसने यह गंदी हरकत की है, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। हम इस घटना के लिए उन सभी ईसाई लोगों से माफी मांगते हैं, जिनकी भावनाएं आहत हुई।” वहीं आईडीएफ की तरफ से इस मामले में जांच के बाद कठोर कार्रवाई का आश्वासन भी दिया गया।

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