लंबित भुगतान की मांग को लेकर किया कलेक्ट्रेट का घेराव
जबलपुर। लंबित भुगतान, मानदेय वृद्धि और अन्य लंबित मांगों को लेकर सोमवार को आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं ने कलेक्ट्रेट कार्यालय का घेराव कर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में पहुंचीं महिला कार्यकर्ता कलेक्टर कक्ष तक पहुंच गईं, जिससे कुछ देर के लिए कलेक्ट्रेट परिसर में गहमागहमी का माहौल बन गया। स्थिति को देखते हुए महिला पुलिस और थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
प्रदर्शन के दौरान अपर कलेक्टर ने आशा-ऊषा कार्यकर्ताओं के प्रतिनिधियों से चर्चा की और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) कार्यालय के अधिकारियों को मौके पर बुलाकर समस्याओं पर बातचीत कराई। अधिकारियों ने समस्याओं के निराकरण का आश्वासन दिया।
संयुक्त मोर्चा की प्रदेश महासचिव पूजा कनोजिया ने आरोप लगाया कि आशा और ऊषा कार्यकर्ताओं की समस्याओं को लेकर कई बार ज्ञापन सौंपे जा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों की कई कार्यकर्ताओं का भुगतान अधूरा या कई महीनों से लंबित है तथा वेतन पर्ची भी उपलब्ध नहीं कराई जाती। उन्होंने एक आशा कार्यकर्ता को कथित रूप से अनुचित तरीके से सेवा से हटाए जाने का भी मुद्दा उठाते हुए निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार मानदेय वृद्धि का लाभ नहीं मिल रहा है। मुख्यमंत्री द्वारा घोषित मानदेय वृद्धि को भी लागू नहीं किया गया है। उन्होंने प्रत्येक माह समय पर भुगतान, लंबित राशि का तत्काल भुगतान और अन्य मांगों के शीघ्र निराकरण की मांग की। चेतावनी दी कि मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा तथा आगामी विधानसभा घेराव भी किया जाएगा।
वहीं, अधिकारियों ने कहा कि शहरी क्षेत्र की आशा कार्यकर्ताओं का भुगतान अप्रैल तक तथा ग्रामीण क्षेत्र की कार्यकर्ताओं का भुगतान मार्च तक किए जाने की जानकारी उपलब्ध है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आशा कार्यकर्ताओं का कार्य वेतन आधारित नहीं बल्कि प्रोत्साहन (इंसेंटिव) आधारित है, इसलिए कार्यों के सत्यापन के बाद ही भुगतान किया जाता है।
अधिकारियों ने यह भी घोषणा की कि प्रत्येक शनिवार सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजे तक जिला कार्यक्रम प्रबंधक (डीपीएम) अपने कार्यालय में आशा एवं ऊषा कार्यकर्ताओं की व्यक्तिगत समस्याएं सुनेंगे। जिन मांगों का समाधान जिला स्तर पर संभव नहीं होगा, उन्हें शासन स्तर पर भेजकर निराकरण का प्रयास किया जाएगा।


