जबलपुर। गोरखपुर थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत में मारपीट के आरोप को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। रामपुर निवासी सतीश सोनकर ने आरोप लगाया है कि आबकारी अधिनियम के एक मामले में थाने पहुंचने पर पुलिस ने उसे बंद कर करीब 70 डंडे मारे, जिससे उसके दोनों पैरों में गंभीर सूजन आ गई और वह ठीक से चलने-फिरने में असमर्थ हो गया।
दूसरी ओर गोरखपुर पुलिस ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और भ्रामक बताया है। थाना प्रभारी नितिन कमल के अनुसार सतीश सोनकर को उसके कब्जे से 21 पाव देशी (मूनलाइट) शराब बरामद होने पर मध्यप्रदेश आबकारी अधिनियम, 1915 की धारा 34(1) के तहत गिरफ्तार किया गया था। आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद उसे नियमानुसार छोड़ दिया गया, क्योंकि मामला जमानती था।
पुलिस का कहना है कि आरोपी के साथ किसी प्रकार की मारपीट नहीं की गई। इसके समर्थन में थाने से बाहर अपने पैरों पर चलते हुए निकलने की तस्वीरें और सीसीटीवी फुटेज भी जारी किए गए हैं। पुलिस के अनुसार रिहा होने के कुछ समय बाद सतीश दोबारा थाने पहुंचा और मारपीट के आरोप लगाने लगा। निष्पक्षता बरतते हुए उसका चिकित्सकीय परीक्षण भी कराया गया, जिसमें गंभीर चोट या मारपीट की पुष्टि नहीं हुई।
थाना प्रभारी ने बताया कि सतीश सोनकर के खिलाफ वर्ष 2006 से विभिन्न थानों में कई आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। उनका आरोप है कि वह पुलिस पर दबाव बनाने और अपनी छवि बचाने के उद्देश्य से झूठे आरोप लगा रहा है।
फिलहाल मामला आरोप और प्रत्यारोप के बीच उलझा हुआ है। पुलिस ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और दावों की जांच कराने की बात कही है। वहीं पूरे घटनाक्रम को लेकर सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।


