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September 10, 2026
सी टाइम्स
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समूल सुधार की जरूरत

नीट-यूजी, जेईई, सीयूईटी आदि जैसी परीक्षाओं का मौजूदा ढांचा कोई संयोगवश सामने नहीं आया है। यह नीतिगत प्राथमिकताओं का परिणाम है। पूर्व चेतावनियों के बावजूद केंद्र ने इन्हें विभिन्न स्तरों पर लागू किया है।
पेपर लीक और परीक्षा में गड़बड़ी की अनवरत घटनाओं से भड़के युवा असंतोष के बीच शिक्षा मंत्रालय की नौ सदस्यीय कमेटी इस निष्कर्ष पर पहुंची है कि कोचिंग संस्थानों का दबदबा तमाम बुराइयों का मूल कारण है। कमेटी के मुताबिक इन संस्थानों को विनियमित करने की जरूरत है, लेकिन यह सिर्फ औचक निरीक्षण या गुमराह करने वाले इश्तहारों पर रोक लगा कर नहीं किया जा सकता। इसके लिए एक राष्ट्रीय कानून बनाने और नीट-यूजी, जेईई, और सीयूईटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं का डिजाइन बदलने की जरूरत होगी। डिजाइन ऐसा होना चाहिए, जिससे छात्रों की कोचिंग संस्थानों पर निर्भरता घटे।
जून 2025 में शिक्षा मंत्रालय ने उच्चतर शिक्षा सचिव विनीत जोशी की अध्यक्षता में ये कमेटी बनाई थी। मकसद कोचिंग संस्थानों के ‘डमी स्कूलÓ बन जाने की समस्या से निजात और प्रवेश परीक्षाओं की स्वच्छता सुनिश्चित करने के बारे में सुझाव देना था। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक कमेटी ने अपनी ड्राफ्ट रिपोर्ट तैयार कर ली है। संभवत: दो हफ्तों में वह अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप देगी। मगर ड्राफ्ट रिपोर्ट के बारे में सामने आई जानकारियों से नहीं लगता कि समिति समस्या की जड़ तक पहुंची है। नीट, जेईई, सीयूईटी जैसी परीक्षाओं का मौजूदा ढांचा कोई संयोगवश सामने नहीं आया है। यह नीतिगत प्राथमिकताओं का परिणाम है। सीयूईटी का प्रस्ताव जब आया, तो चेतावनी दी गई थी कि इससे स्कूली पढ़ाई का महत्त्व घटेगा और कोचिंग संस्थानों का धंधा बढ़ेगा।
फिर भी नरेंद्र मोदी सरकार ने कॉलेजों में दाखिले के लिए ये नया सिस्टम लागू किया। और फिर समस्या सिर्फ इलीट परीक्षाओं तक सीमित नहीं है। पिछले हफ्ते ही महाराष्ट्र में टीचर एलिजिबिलिटी टेस्ट का पेपर लीक हो गया। परीक्षा आयोजन में ऐसी गड़बडिय़ां देश भर में और जड़ तक पहुंच चुकी हैं। उनके रहते ऊपरी परीक्षाओं को दोषमुक्त बना लिया जाएगा, यह सोच अपने-आप में समस्याग्रस्त है। अत: जोशी कमेटी की सिफारिशों से मीडिया और आम चर्चाओं को फौरी तौर पर मैनेज करने में भले कुछ कामयाबी मिल जाए, उनसे ध्वस्त होती परीक्षा व्यवस्था नहीं संभलेगी। उसके लिए जिस समग्र और समूल सुधार की जरूरत है, वह फिलहाल सरकार की सोच से बाहर है।

 

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