कटंगी। गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर राजा भोज शासकीय महाविद्यालय, कटंगी में महर्षि सांदीपनि गुरु पर्व का गरिमामय आयोजन किया गया। कार्यक्रम में कटंगी विधायक एवं महाविद्यालय जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष श्री गौरव सिंह पारधी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने गुरुजनों का शॉल एवं पुष्पगुच्छ भेंटकर सम्मान किया तथा विद्यार्थियों, प्राध्यापकों और महाविद्यालय परिवार के साथ गुरु-शिष्य परंपरा के महत्व पर विचार साझा किए।
भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च : विधायक गौरव सिंह पारधीअपने संबोधन में विधायक श्री गौरव सिंह पारधी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु का स्थान सर्वोच्च है। गुरु केवल ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि जीवन को सही दिशा, संस्कार और व्यक्तित्व प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि माता-पिता के बाद गुरु ही व्यक्ति को समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराते हैं। विधायक श्री पारधी ने सभी गुरुजनों के उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु एवं सतत मार्गदर्शन की कामना करते हुए गुरु पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएँ दीं।
*मुख्य वक्ताओं ने गुरु-शिष्य परंपरा का महत्व बताया*
कार्यक्रम के मुख्य वक्ता श्री दिनेश मेश्राम ने अपने उद्बोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति की पहचान गुरु-शिष्य परंपरा से है। गुरु केवल ज्ञान का संचार नहीं करते, बल्कि चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों और जीवन के आदर्शों की स्थापना भी करते हैं। उन्होंने विद्यार्थियों से गुरुजनों के मार्गदर्शन का सम्मान करते हुए अनुशासन, संस्कार और निरंतर अध्ययन को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। वहीं श्रीमती कुसुमलता उइके ने भी गुरु के प्रति श्रद्धा, समर्पण और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में गुरुजनों की भूमिका पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता श्री दिनेश मेश्राम, महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. अनिल शेंडे, श्रीमती कुसुमलता उइके, वैभव गुप्ता, टिंकल बाघमरे, अनुज अग्रवाल, प्राध्यापकगण, छात्र-छात्राएँ एवं महाविद्यालय परिवार के सदस्य बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान गुरु-शिष्य परंपरा, भारतीय संस्कृति एवं शिक्षा के मूल्यों पर सारगर्भित विचार रखे गए।


