वायनाड, मुथंगा पुलिस फायरिंग मामले में आखिरकार कानूनी लड़ाई खत्म हो गई। वारदात के 23 साल से अधिक समय बाद शुक्रवार को वायनाड जिला प्रधान सत्र न्यायालय ने पुलिस कॉन्स्टेबल केवी विनोद की हत्या के मामले में अपना बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया। इसके साथ ही राज्य के सबसे लंबे समय से लंबित आपराधिक मुकदमों में से एक का न्यायिक समापन हो गया। इस मामले में प्रिंसिपल सेशंस जज ए. अय्यूब खान ने 35 आरोपियों को बरी कर दिया, क्योंकि अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ आरोप साबित करने में नाकाम रहा, जबकि 21 अन्य लोगों को दंगा करने, गैर-कानूनी तरीके से इकट्ठा होने और वन भूमि पर अतिक्रमण करने जैसे विभिन्न अपराधों का दोषी पाया गया।
अदालत ने कहा कि सीबीआई हत्या की साजिश और हत्या की कोशिश के आरोप साबित करने में नाकाम रही। अदालत ने पाया कि केरल आर्म्ड पुलिस की चौथी बटालियन के कॉन्स्टेबल विनोद की हत्या दूसरे आरोपी अशोकन ने की थी, जिसकी मुकदमे के दौरान मौत हो गई। हत्या के लिए जिम्मेदार एकमात्र आरोपी के अब जीवित न होने के कारण, इस हत्या के लिए अब कोई सजा नहीं सुनाई जा सकती। बाकी सजाएं सिर्फ हिंसा से जुड़े अपराधों के लिए हैं।


