सिवनी- वन विभाग में सिवनी वन सर्किल के वन संरक्षक (सीएफ) का अतिरिक्त प्रभार डीएफओ स्तर के वर्किंग प्लान अधिकारी ए.ए. अंसारी को सौंपे जाने के बाद विभागीय प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे हैं। सिवनी सीएफ का पद लंबे समय से रिक्त बताया जा रहा है और अतिरिक्त प्रभार के जरिए व्यवस्था संचालित की जा रही है।
विभागीय जानकारों के अनुसार, सामान्य तौर पर रिक्त सीएफ पद का अतिरिक्त प्रभार आसपास के सीएफ या सीसीएफ स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को दिया जाता है। ऐसे में छिंदवाड़ा में पदस्थ सीसीएफ कमल अरोरा, पेंच टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक देवा प्रसाद और बालाघाट के सीएफ गौरव चौधरी जैसे वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी के बावजूद डीएफओ स्तर के अधिकारी को जिम्मेदारी दिए जाने पर चर्चा शुरू हो गई है।
इससे पहले सिवनी वर्किंग प्लान अधिकारी संध्या के पास सिवनी सर्किल का अतिरिक्त प्रभार था। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ अधिकारियों की शिकायतों के बाद उनसे यह प्रभार वापस लिया गया। हालांकि शिकायतों की प्रकृति और कार्रवाई को लेकर विभाग की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। नए आदेश में संध्या को सिवनी वर्किंग प्लान के साथ आंचलिक कार्य आयोजना, जबलपुर का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
*वर्किंग प्लान के साथ सर्किल का अतिरिक्त दायित्व*
वर्किंग प्लान वन प्रबंधन की दीर्घकालीन योजना तैयार करने से जुड़ा महत्वपूर्ण तकनीकी कार्य है। ऐसे में वर्किंग प्लान अधिकारी को बड़े वन सर्किल का प्रशासनिक अतिरिक्त प्रभार दिए जाने से दोनों जिम्मेदारियों के बीच कार्यभार और प्राथमिकता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
वन विभाग के कई सर्किलों में सीएफ स्तर के पद रिक्त बताए जा रहे हैं। ऐसे में विभागीय हलकों में चर्चा है कि अतिरिक्त प्रभार की व्यवस्था कब तक जारी रहेगी और सिवनी सहित अन्य रिक्त सर्किलों में नियमित सीएफ की पदस्थापना कब होगी।
फिलहाल ए.ए. अंसारी को अतिरिक्त प्रभार दिया जाना प्रशासनिक आदेश है, लेकिन इस निर्णय ने वरिष्ठता, अतिरिक्त प्रभार की प्रक्रिया और विभागीय प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर बहस जरूर छेड़ दी है। विभाग के आधिकारिक स्पष्टीकरण और नियमित पदस्थापना पर अब सबकी नजर है।


