नो-एंट्री व्यवस्था पर उठे सवाल, नागरिकों में रोष
जबलपुर। गढ़ा थाना क्षेत्र के संजीवनी नगर में गुरुवार रात तेज रफ्तार हाइवा की चपेट में आने से स्कूटी सवार 24 वर्षीय शिक्षिका दीक्षा गुप्ता की दर्दनाक मौत हो गई। हादसा पटेल स्वीट्स के पास हुआ। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दीक्षा सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गईं। सूचना पर पहुंची पुलिस ने स्थानीय लोगों की मदद से उन्हें मेडिकल अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
बताया गया है कि दीक्षा शाही तालाब के पास स्थित रॉयल स्कूल में शिक्षिका थीं और बच्चों को कोचिंग भी पढ़ाती थीं। गुरुवार रात कोचिंग पढ़ाने के बाद वह हनुमान मंदिर दर्शन के लिए गई थीं। दर्शन के बाद स्कूटी से घर लौटते समय संजीवनी नगर में हाइवा ने उन्हें टक्कर मार दी।
हादसे की खबर मिलते ही परिजन अस्पताल पहुंचे, लेकिन तब तक उनकी बेटी की मौत हो चुकी थी। शुक्रवार को गमगीन माहौल में परिजनों और परिचितों ने दीक्षा को अंतिम विदाई दी।
गढ़ा पुलिस के अनुसार रात करीब 10 बजे पटेल स्वीट्स के पास हादसे की सूचना मिली थी। पुलिस ने हाइवा चालक को गिरफ्तार कर लिया है। वाहन की गति और दुर्घटना के कारणों सहित अन्य पहलुओं की जांच की जा रही है।
नो-एंट्री पर सवाल
हादसे के बाद संजीवनी नगर की यातायात व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस मार्ग पर भारी वाहनों के प्रवेश पर नो-एंट्री लागू है, तो हाइवा वहां तक कैसे पहुंचा? क्या नो-एंट्री व्यवस्था का पालन सिर्फ कागजों में हो रहा है या सड़क पर भी इसकी प्रभावी निगरानी की जा रही है?
दीक्षा की मौत ने एक बार फिर शहर में भारी वाहनों की आवाजाही, नो-एंट्री के पालन और यातायात निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लोगों का कहना है कि नियम तभी प्रभावी होंगे, जब उनका पालन जमीन पर भी सख्ती से कराया जाए।
हादसे का समय और स्पष्ट करें
नो-एंट्री दावे को संतुलित करें
पुलिस कार्रवाई का विवरण उभारें


