फर्जी हाजिरी से सरकारी भुगतान तक गंभीर आरोप, वर्षों से शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होने पर ग्रामीणों में आक्रोश
प्रहलाद गुप्ता कोतमा- जनपद पंचायत बदरा अंतर्गत ग्राम पंचायत सकोला में रोजगार सहायक रमेश विश्वकर्मा की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिला। ग्रामीणों ने रोजगार सहायक पर मनमानी तरीके से कार्य करने और गरीब मजदूरों एवं हितग्राहियों को परेशान किए जाने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराकर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
ग्रामीणों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से पंचायत से जुड़े कार्यों को लेकर लगातार शिकायतें सामने आती रही हैं। ग्रामीणों ने फर्जी हाजिरी, मास्टर रोल, संदिग्ध बिल एवं भुगतान तथा सरकारी राशि के कथित दुरुपयोग को लेकर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों के अनुसार इन शिकायतों को लेकर सीएम हेल्पलाइन, जनपद पंचायत और जिला प्रशासन सहित विभिन्न स्तरों पर शिकायतें की जा चुकी हैं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से लोगों में नाराजगी बनी हुई है।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ मजदूरों से कथित तौर पर निजी अथवा घरेलू कार्य करवाकर उनके नाम पंचायत के मास्टर रोल में दर्ज किए जाने और मजदूरी भुगतान की शिकायतें सामने आई हैं। ग्रामीणों की मांग है कि मजदूरों के बयान, मास्टर रोल और पंचायत के भुगतान रिकॉर्ड की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि ग्राम पंचायत सकोला में पिछले कई वर्षों में हुए रोजगार एवं विकास कार्यों की विशेष जांच कराई जाए। इसमें मास्टर रोल, मजदूरों की वास्तविक उपस्थिति, भुगतान, बिल-वाउचर और मौके पर हुए कार्यों का भौतिक सत्यापन शामिल किया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि जांच के बाद यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने कहा कि उनकी मांग किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ कार्रवाई कराने की नहीं, बल्कि पंचायत में पारदर्शिता और गरीब मजदूरों को उनका अधिकार दिलाने की है। उनका कहना है कि लगातार शिकायतों के बावजूद यदि कार्रवाई नहीं होती है तो ग्रामीणों का शासन-प्रशासन पर विश्वास प्रभावित होता है। अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर है।
इनका कहना है
“ग्राम पंचायत सकोला में लंबे समय से ग्रामीण रोजगार सहायक की कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें कर रहे हैं। मामले की निष्पक्ष जांच कर पंचायत के रिकॉर्ड, मास्टर रोल और कार्यों का सत्यापन कराया जाना चाहिए। यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन को मामले को गंभीरता से लेकर ग्रामीणों को न्याय दिलाना चाहिए।”
— सचिन तिवारी, ग्रामीण मंडल अध्यक्ष


