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October 7, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के बर्फीले इलाकों में जनसंख्या की गणना पूरी, शेष जिलों में फरवरी 2027 में होगी प्रक्रिया



नई दिल्ली, 6 अक्टूबर  देश की पहली कागज रहित जनगणना के तहत जम्मू-कश्मीर के 16 आंशिक और लद्दाख के सभी बर्फीले क्षेत्रों में जनसंख्या गणना का दूसरा चरण सफलतापूर्वक पूरा कर लिया गया है। मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने बताया कि सुरक्षा कारणों से रक्षा और अर्धसैनिक बलों की गणना कागजी अनुसूची पर की गई है, जबकि शेष चार जिलों में यह प्रक्रिया फरवरी 2027 में प्रस्तावित है।

मुख्य जनगणना अधिकारी अमित शर्मा ने कहा, “मैं आपके माध्यम से सभी को बताना चाहूंगा कि जनगणना का दूसरा चरण जनसंख्या गणना का है। पहला चरण मकान सूचीकरण था, यह दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण चरण है। इसमें हमने बर्फ से घिरे हुए गैर-समकालिक क्षेत्रों को चिन्हित किया था, जो बर्फबारी के कारण कट जाते हैं और बाद में वहां गणना कराना मुश्किल हो जाता है। ऐसे चिन्हित क्षेत्रों में हमने पिछले माह जनसंख्या गणना का कार्य पूरा कर लिया है।”

उन्होंने आगे कहा कि 1 से 30 सितंबर के बीच दूसरे चरण के 40 सवालों को लेकर हमने लोगों से जानकारी एकत्रित की है। जम्मू-कश्मीर के 16 आंशिक रूप से बर्फ से घिरे जिलों में, जम्मू, श्रीनगर, राजौरी और सांबा को छोड़कर, यह कार्य किया गया है। किश्तवाड़ जिला 100 प्रतिशत बर्फीले क्षेत्र में आता है। इन सभी जिलों को हमने कवर किया है। लद्दाख पूरी तरह से बर्फीला क्षेत्र था, यानी लेह और कारगिल, जो उस समय लद्दाख के दो जिले थे, वहां भी यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इसी तरह जम्मू-कश्मीर के 16 आंशिक बर्फीले जिलों में जनसंख्या गणना का कार्य संपन्न हुआ, जिसे हमने बेहतर और अनुकरणीय तरीके से पूरा किया है।

मुख्य जनगणना अधिकारी ने कहा कि यह भारत में पहली बार कागज-रहित जनगणना हो रही थी। यही डेटाबेस दूरदराज के क्षेत्रों के विकास और विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के लिए आधार बनेगा। मकान सूचीकरण के दौरान वहां उपलब्ध सुविधाओं के आधार पर आने वाले समय में योजनाओं में इस डेटा का उपयोग किया जाएगा। इसके साथ ही बर्फीले क्षेत्रों में विशेष प्रभारों को भी कवर किया गया, यानी रक्षा और अर्धसैनिक बलों के जवानों की गणना की गई।

उन्होंने आगे कहा कि सुरक्षा कारणों और राष्ट्रीय हित को देखते हुए उनकी गणना कागजी अनुसूची पर की गई। हमने इस जनगणना गतिविधि को अच्छी तरह से पूरा किया है। कागजी अनुसूची के बाद इसे डिजिटाइज कर एन्क्रिप्टेड तरीके से डेटाबेस में लाया जाएगा। चाहे वह नागरिक आबादी हो या रक्षा बलों की, बर्फीले क्षेत्रों की पूरी गतिविधि संपन्न हो चुकी है। हमने पूरे लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के 16 जिलों को आंशिक रूप से कवर किया है।

अमित शर्मा ने कहा कि बाकी के चार जिले जैसे जम्मू, श्रीनगर, राजौरी और सांबा, साथ ही इन 16 जिलों के आंशिक रूप से बचे हुए क्षेत्रों में, सबसे अधिक संभावना है कि फरवरी 2027 में अधिसूचना जारी होगी, तब जनसंख्या गणना कराई जाएगी। हम चाहेंगे कि आपके माध्यम से लोगों को जानकारी मिले कि यह गतिविधि बहुत आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि इसका चुनाव से कोई लेना-देना नहीं है, हर जगह यह सवाल आता है। चुनाव एक अलग स्वायत्त संस्था है, जबकि यह भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त का कार्यालय है। यह डेटा अत्यंत आवश्यक है। अभी तक केंद्र सरकार की सभी योजनाओं में 2011 की जनगणना के आंकड़ों का उपयोग हो रहा है, जो अंतिम जनगणना थी।

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