भोपाल 3 जुलाई । मध्यप्रदेश की पहचान टाइगर स्टेट के तौर पर है, मगर अब तो सियासी मैदान मे भी टाइगर पर जंग तेज हो गई है। पूर्व केंद्रीय मंत्री और राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद पहली बार भोपाल पहुंचे ज्योतिरादित्य सिंधिया के ‘टाइगर अभी जिंदा है’ वाले बयान ने पूरे सियासी माहौल को गरमा दिया है। कांग्रेस सिंधिया पर तरह-तरह से हमले बोल रही है तो वही सिंधिया अपने बयान को दोहराने से भी नहीं चूक रहे हैं।
राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद पहली बार गुरुवार को ज्योतिरादित्य सिंधिया भोपाल पहुंचे और शिवराज सिंह चौहान सरकार के मंत्रिमंडल के दूसरे विस्तार के कार्यक्रम में शामिल हुए। उन्होंने कांग्रेस के प्रमुख नेता पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्विजय सिंह पर तीखा हमला बोला। साथ ही कहा कि बीते दो माह से कुछ लोग छवि को धूमिल करने की कुछ कोशिश कर रहे हैं, उन्हें मैं बता देना चाहता हूं कि टाइगर अभी जिंदा है।
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय िंसंह ने भी सिंधिया पर अपने ही अंदाज में हमला बोला है। उनका कहना है जब शिकार प्रतिबंधित नहीं था, तब मैं और माधवराव सिंधिया शेर का शिकार किया करते थे। इंदिरा गांधी के ‘वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन एक्ट’ लाने के बाद से मैं अब सिर्फ शेर को कैमरे में उतारता हूं।
पूर्व मंत्री सुभाष कुमार सोजतिया ने सिंधिया द्वारा खुद को टाइगर बताए जाने पर तंज कसा है। उनका कहना है कि मप्र मे टाइगर्स की संख्या देश में सर्वाधिक है ऐसे मे प्रदेश के हर नागरिक के लिये गर्व होना स्वाभाविक है, किंतु अपने आपको टाइगर कहना एक फिल्मी डायलाग से ज्यादा कुछ भी नहीं है! सिंधिया राजघराने के इतिहास के जानकार उन्हें टाइगर के नाम से सम्बोधन पर परहेज ही करेंगे! सिंधिया को मप्र में वर्तमान राजनीति के उलटफेर के नायक होने के कारण कम से कम टाइगर तो नही माना जा सकता!
वहीं भाजपा प्रदेषाध्यक्ष विष्णु दत्त शर्मा का कहना है कि दिग्विजय सिंह का स्वभाव रहा है शिकार करना। सिंधिया ने दूसरी बार भी टाइगर जिंदा होने वाला बयान को भाजपा की गुरुवार की रात को हुए कार्यक्रम में फिर जिक्र किया। उन्होंने कहा कि कमल नाथ और दिग्विजय सिंह सुन लीजिए ‘टाइगर जिंदा है।’
सिंधिया के करीबी और कांग्रेस के प्रदेश सचिव रहे सुनील तिवारी का कहना है कि सिंधिया के प्रभाव और जनाधार से कुछ कांग्रेस नेता हमेशा परेशान रहे है, यही कारण है कि अब तरह-तरह के आरोप लगा रहे है। कांग्रेस के नेताओं में यह स्वीकार करने का साहस नहीं है कि वे यह मानें कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनाने में सिंधिया का योगदान था। सिंधिया हमेशा ही जनता के हित में आवाज उठाते रहे है, भाजपा में वे आम जनता की सपनों को पूरा करने आए हैं।
राजनीति के जानकारों का कहना है कि राज्य की राजनीति में अब सीधे आमने-सामने की लड़ाई की शुरुआत हो गई है। आने वाले समय में सियासी जंग का मैदान ग्वालियर-चंबल संभाग बनेगा, जहां सिंधिया के सामने पूरी कांग्रेस होगी। उप-चुनाव में रोचक सियासी जग की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।


