दिल्ली उच्च न्यायालय ने सोमवार (23 दिसंबर, 2024) को पूर्व आईएएस प्रोबेशनर पूजा खेडकर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी। खेडकर पर आरोप है कि उन्होंने यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा, 2022 में आरक्षण का लाभ लेने के लिए अपने आवेदन में गलत जानकारी दी।
यूपीएससी और दिल्ली पुलिस ने जताई आपत्ति
अग्रिम जमानत याचिका का विरोध करते हुए संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) और दिल्ली पुलिस ने कहा कि यह मामला गंभीर प्रकृति का है और खेडकर की गिरफ्तारी आवश्यक है। यूपीएससी का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ अधिवक्ता नरेश कौशिक और वकील वर्धमान कौशिक ने किया।
अदालत का सख्त रुख
न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह ने याचिका खारिज करते हुए कहा, “अग्रिम जमानत याचिका खारिज की जाती है। गिरफ्तारी से अंतरिम संरक्षण रद्द किया जाता है।” न्यायाधीश ने यह भी कहा कि खेडकर के खिलाफ प्रथम दृष्टया एक मजबूत मामला बनता है और साजिश के पूरे पहलू की गहराई से जांच की जरूरत है।
अदालत ने इस मामले को संवैधानिक निकाय और समाज के साथ धोखाधड़ी का “क्लासिक मामला” करार दिया। न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि इस प्रकार की धोखाधड़ी संविधानिक संस्थाओं की साख को कमजोर करती है और समाज में गलत संदेश देती है।
कड़ी जांच का आदेश
न्यायालय ने जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि इस मामले में साजिश के सभी पहलुओं का पर्दाफाश किया जाए। न्यायाधीश ने कहा कि ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई यह सुनिश्चित करती है कि संवैधानिक प्रक्रिया और समाज का विश्वास बनाए रखा जाए।


