इंदौर। मध्यप्रदेश के सबसे बड़े शासकीय महाराजा यशवंतराव अस्पताल (एमवायएच) में हुई लापरवाही ने एक बार फिर स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल के एनआईसीयू (Neonatal Intensive Care Unit) में चूहों के कुतरने से घायल हुए दोनों नवजात शिशुओं की मौत हो गई। पहला नवजात मंगलवार को और दूसरा बुधवार को जिंदगी की जंग हार गया।
क्या है पूरा मामला?
धार जिले के गढ़ा ग्राम की नवजात बच्ची और देवास जिले के कमलापुर (बागली तहसील) के नवजात को गंभीर हालत में एमवायएच के एनआईसीयू में भर्ती कराया गया था। रविवार को एक बच्चे के हाथ और सोमवार को दूसरे बच्चे के कंधे को चूहों ने बुरी तरह कुतर डाला। डॉक्टरों ने शुरुआत में इसे स्किन इंफेक्शन बताकर मामला टालने की कोशिश की। लेकिन जब नवजात के हाथ में गंभीर जख्म पाए गए तो अस्पताल की लापरवाही उजागर हुई।
मंगलवार को धार जिले की बच्ची की मौत हो गई थी, जबकि बुधवार को देवास जिले से आए 12-15 दिन के नवजात ने भी दम तोड़ दिया। बताया जा रहा है कि इस नवजात को जन्म से ही गंभीर समस्याएं थीं—आंत उलझी हुई थी और शौच का रास्ता पूरी तरह से नहीं बना था।
अस्पताल प्रशासन की सफाई
एमवायएच अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने कहा कि मौत का कारण चूहों का काटना नहीं है, बल्कि बच्चों की पहले से गंभीर स्वास्थ्य स्थिति थी। उन्होंने बताया कि धार जिले की बच्ची का वजन केवल 1.02 किलो था और उसका हृदय पूरी तरह विकसित नहीं था। मौत के कारण स्पष्ट करने के लिए पोस्टमार्टम कराया जा रहा है।
कार्रवाई और जांच
घटना सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कंप मच गया।
-
नर्स श्वेता चौहान और आकांक्षा बेंजामिन को तत्काल निलंबित किया गया।
-
नर्सिंग सुपरिंटेंडेंट मारग्रेट जोसेफ को हटाया गया।
-
एनआईसीयू इंचार्ज सहित कई कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।
डीन डॉ. अरविंद घनघोरिया ने माना कि लंबे समय से आईसीयू में चूहों की आवाजाही हो रही थी, लेकिन रोकथाम के प्रभावी उपाय नहीं किए गए।
पेस्ट कंट्रोल और ढीला प्रबंधन
अस्पताल प्रशासन हर 15 दिन में निजी कंपनी से पेस्ट कंट्रोल की रिपोर्ट लेता है और इसके लिए हर महीने लगभग 1 लाख रुपये का भुगतान भी करता है। बावजूद इसके अस्पताल परिसर में टूटे सीवेज ढक्कनों और ड्रेनेज लाइनों के कारण चूहों की आवाजाही आसान बनी हुई है।
परिवार की पीड़ा
धार जिले की बच्ची को पहले एमटीएच (महाराजा तुकोजीराव होल्कर अस्पताल) में भर्ती किया गया था, वहां से एमवायएच रेफर किया गया। हालांकि, बच्ची के माता-पिता गंभीर स्थिति देखकर उसे छोड़कर चले गए थे। देवास जिले का बच्चा भी रेफर होकर एमवायएच आया था, जिसकी हालत बेहद नाजुक थी।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य तंत्र
राज्य का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के बावजूद एमवायएच में मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो पा रही। नवजातों को चूहों द्वारा कुतरना और फिर मौत का शिकार होना प्रशासनिक लापरवाही का उदाहरण है।
अब स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन की जिम्मेदारी है कि इस घटना से सबक लेकर अस्पताल में सुरक्षा और सफाई व्यवस्था को प्राथमिकता दें, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी त्रासदी का सामना न करना पड़े।


