जबलपुर। शहर में संचालित कबाड़ कारोबार एक बार फिर सवालों के घेरे में है। जानकारी के अनुसार जबलपुर की विभिन्न कबाड़ मंडियों से प्रतिदिन 400 टन से अधिक स्क्रैप ट्रकों और अन्य मालवाहक वाहनों के जरिए शहडोल भेजा जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि इस भारी मात्रा में आने वाले स्क्रैप का कोई समुचित रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है और न ही इसकी नियमित निगरानी की जा रही है।
सूत्रों के मुताबिक शहर में चार दर्जन से अधिक चिन्हित कबाड़खानों में प्रतिमाह करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। आरोप हैं कि यहां चोरी के दोपहिया, चारपहिया और भारी वाहनों को कुछ ही समय में काटकर उनके पुर्जे अलग-अलग बेच दिए जाते हैं। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार चोरी हुए बड़ी संख्या में वाहन बरामद नहीं हो पाते, जिससे यह आशंका और गहराती है कि कई वाहन कबाड़ मंडियों में खपा दिए जाते हैं।
बताया जाता है कि माढ़ोताल, गोहलपुर, अधारताल, हनुमानताल और बेलबाग क्षेत्र में संचालित कुछ बड़े कबाड़खानों में आसपास के जिलों से आने वाले वाहनों की भी कटाई होती है। इनमें सतना, कटनी, बालाघाट, शहडोल, उमरिया, दमोह, डिंडोरी, छिंदवाड़ा, सिवनी और नरसिंहपुर जैसे जिलों के वाहन शामिल होने की चर्चा है।
जानकारों का कहना है कि वाहन कटाई के लिए परिवहन विभाग की एनओसी और संबंधित दस्तावेजों का सत्यापन अनिवार्य होना चाहिए। साथ ही कबाड़खानों और वाहन मरम्मत केंद्रों में आने-जाने वाले पुर्जों का पूरा लेखा-जोखा रजिस्टर में दर्ज कर नियमित जांच की जाए। इससे चोरी के वाहनों की अवैध कटाई और पुर्जों की खरीद-फरोख्त पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।


