July 7, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की दुनिया और पूरी मानवता पर होगा: पीएम मोदी


जकार्ता, 7 जुलाई  इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सर्वोच्च सम्मान ‘बिन्तांग अदिपुर्ना ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से सम्मानित किया। दोनों देशों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत बनाने के लिए कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) और अन्य समझौतों पर हस्ताक्षर किए। भारत और इंडोनेशिया के बीच यूपीआई भुगतान प्रणाली पर भी चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत-इंडोनेशिया की साझेदारी का सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की दुनिया और पूरी मानवता पर पड़ेगा।

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा, “मैं इस गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए राष्ट्रपति प्रबोवो का हृदय से स्वागत करता हूं। पिछले साल भारत के गणतंत्र दिवस के मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में उनका स्वागत करने का हमें अवसर मिला। आज उनके आत्मीयता भरे निमंत्रण पर इंडोनेशिया की यात्रा करके मुझे बहुत खुशी हो रही है। आज सुबह मुझे बहुत स्नेह और आदर के साथ इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान दिया गया। यह सम्मान कोटि-कोटि भारतवासियों का, इंडोनेशिया के लोगों की भावनाओं, भारत और इंडोनेशिया के ऐतिहासिक और आत्मीय संबंधों का है। मैं राष्ट्रपति प्रबोवो, सरकार और यहां की जनता का आभार व्यक्त करता हूं।”

उन्होंने कहा कि बीते वर्षों में भारत और इंडोनेशिया के संबंधों में एक नई ऊर्जा, नया विश्वास और एक नई गहराई आई है। 2018 में बनी हमारी व्यापक रणनीतिक साझेदारी एक नई उड़ान ले रही है। हम विकास, सुरक्षा, तकनीक, संस्कृति और शिक्षा, हर क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम बढ़ा रहे हैं। मुझे विश्वास है कि आज से भारत-इंडोनेशिया साझेदारी का एक सुनहरा अध्याय शुरू होगा। इसका सकारात्मक प्रभाव 21वीं सदी की दुनिया और पूरी मानवता पर पड़ेगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, हमारे देशों के बीच बढ़ता विश्वास, हमारी रक्षा सुरक्षा और मैरीटाइम सहयोग को मजबूत कर रहा है। आज हमने रक्षा एक्सचेंज, आपदा प्रबंधन और औद्योगिकी सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई है। हम दोनों देशों के कोस्टगार्ड हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा के लिए मिलकर काम करेंगे। दो करीबी मैरीटाइम देश होने के नाते, हमने ब्लू इकॉनॉमी, पोर्ट डेवलपमेंट और मैरीटाइम ट्रेड में आपसी सहयोग बढ़ाने का निर्णय लिया है। भारत और इंडोनेशिया के लिए गरीबी को परास्त करना और अपने नागरिकों तक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सर्वोच्च प्राथमिकता है।

उन्होंने आगे कहा कि भारत ने इंडोनेशिया के साथ अपनी मील स्कीम और सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पब्लिक डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम) से जुड़े अनुभव और समाधान साझा किए हैं। अब दोनों देश इस सहयोग को अगले स्तर पर ले जा रहे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग से दोनों देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बेहतर होगी। आज हुए समझौतों के तहत भारत की किफायती दवाइयां इंडोनेशिया के नागरिकों तक अधिक आसानी से पहुंच सकेंगी। साथ ही, भारत इंडोनेशिया के डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के क्षमता निर्माण (कैपेसिटी बिल्डिंग) में भी सहयोग करेगा। भारत में विकसित गेहूं के बीजों की आपूर्ति से इंडोनेशिया की खाद्य सुरक्षा को और मजबूती मिलेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि 21वीं सदी तकनीक की है। भारत और इंडोनेशिया युवा ऊर्जा से भरे देश हैं। हमें अपने युवाओं के बीच एआई, टेलीकॉम और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्रों में तकनीकी सहयोग बढ़ाने के लिए आज एक अहम समझौता किया है। हम दोनों देशों के बीच स्टार्टअप सहयोग को गहरा करने पर सहमत हुए। हम इंडोनेशिया में भारत के प्रतिष्ठित मैनेजमेंट इंस्टीट्यूट आईआईएम बेंगलुरु का कैंपस खोलने जा रहे हैं। इससे पूरे आसियान क्षेत्र के युवाओं को बहुत लाभ होगा।

उन्होंने कहा कि स्पेस क्षेत्र में हमारे बीच दशकों पुराना सहयोग रहा है। इसे आगे बढ़ाते हुए ज्वाइंट रिसर्च टेक्नोलॉजी शेयरिंग और क्षमता निर्माण से जुड़े अहम फैसले लिए गए। आज के युग में तकनीक की सप्लाई चेन रेजिलिएंस मायने रखती है। क्रिटिकल मिनरल्स और स्टील के क्षेत्र में सप्लाई चेन को अधिक मजबूती देने के लिए भी अहम समझौता हुआ है। हमारी कंपनी के बीच स्टेनलेस स्टील और रेयर अर्थ मैग्नेट को लेकर साझेदारी की नई शुरुआत हो रही है।

उन्होंने कहा कि पीपल टू पीपल टाइज हमारे संबंधों की सबसे बड़ी शक्ति है। हमें बहुत खुशी है कि भारत की यूपीआई और इंडोनेशिया के पेमेंट सिस्टम के साथ इंटिग्रेट होने जा रहे हैं। इससे इज ऑफ डूइंग बिजनेस और इज ऑफ ट्रैवल दोनों को ही बल मिलेगा।

बुधवार के कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने कहा, “कल राजपति प्रबोवो के साथ मुझे प्रम्बानन मंदिर के कंजर्वेशन प्रोजेक्ट को लॉन्च करने का सौभाग्य मिलेगा। 1,000 वर्ष से भी अधिक पुराना प्रम्बानन मंदिर भारत और इंडोनेशिया साझा सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है। हम दोनों देश गुरुदेव रवींद्र नाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा का शताब्दी वर्ष धूम धाम से मनाएंगे। इंडोनेशिया की विकास यात्रा में महान शिक्षाविद और यहां के पहले शिक्षा मंत्री हजूर देवांतरा का अहम योगदान रहा है। शिक्षा को लेकर उनके विचारों पर गुरुदेव टैगोर की सोच का गहरा प्रभाव था। इसलिए भारत इंडोनेशिया इस शताब्दी वर्ष को टैगोर और देवांतरो संस्कृति और शिक्षा कूटनीति के वर्ष के रूप में मनाएगा।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्य और विविधता में एकता भारत और इंडोनेशिया की साझी ताकत रही है। दोनों देशों के चुनाव आयोगों के बीच एमओयू से हम लोकतांत्रिक सहयोग को मजबूत करते जा रहे हैं। वैश्विक मुद्दों पर भी भारत और इंडोनेशिया का सहयोग निरंतर बढ़ रहा है।

उन्होंने कहा, “हिंद-प्रशांत के प्रति हमारे आउटलुक में भी तालमेल है। भारत ने हमेशा आसियान सेंट्रलिटी को विशेष महत्व दिया। वैश्विक उथल-पुथल के दौर में भारत का मानना है कि डायलॉग और डिप्लोमेसी की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण होंगी। फिलिस्तीन के विषय में हम टू-स्टेट सॉल्यूशन और दीर्घकालिक शांति का समर्थन करते हैं। एक सुनहरा दौर हम दोनों देशों के सामने दस्तक दे रहा है। हमारे इतिहास में साझा संस्कृति है, हमारे वर्तमान में साझा विश्वास है और हमारे भविष्य में साझा समृद्धी है। मुझे भरोसा है, हम साथ मिलकर इंडोनेशिया और विश्व भारत का संदर्भ साकार करेंगे।”

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