September 14, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

राम मंदिर चढ़ावा मामला: बैंक खातों की जांच के लिए तीन आरोपियों की पुलिस रिमांड मांगी


अयोध्या, 7 जुलाई अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही पुलिस ने तीन आरोपियों की पुलिस रिमांड के लिए अदालत का रुख किया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों के बैंक खातों और बरामद नकदी के वित्तीय लेनदेन की जांच के लिए उनकी हिरासत आवश्यक है।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों के बैंक खातों से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेज और लेनदेन की जानकारी जुटाने के लिए रिमांड मांगी गई है। जांच एजेंसियों को संदेह है कि कथित रूप से चोरी की गई दान राशि का एक हिस्सा विभिन्न सामान खरीदने में खर्च किया गया। ऐसे में बैंक रिकॉर्ड की जांच के बाद ही कथित अपराध से अर्जित धन (प्रोसीड्स ऑफ क्राइम) का पूरा ब्यौरा सामने आ सकेगा।

पुलिस ने बताया कि आरोपी लवकुश मिश्रा के पास से 14.25 लाख रुपये, अनुकल्प मिश्रा के पास से 16.82 लाख रुपये और करुणेश पांडे के पास से 18.07 लाख रुपये नकद बरामद किए गए हैं।

जांच अधिकारियों का कहना है कि बैंक रिकॉर्ड मिलने के बाद यह पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि बरामद धनराशि का स्रोत क्या है और क्या इसका संबंध मंदिर की दान राशि की कथित चोरी से है।

पुलिस के मुताबिक, आरोपी करुणेश पांडे के पिता ने दावा किया है कि उनकी पत्नी के बैंक खाते में 18 लाख रुपये जमा थे। प्रस्तावित पुलिस रिमांड के दौरान करुणेश से यह भी पूछताछ की जाएगी कि उसकी पत्नी के खाते में यह राशि कैसे जमा हुई।

जांच अधिकारियों का कहना है कि यदि बैंक रिकॉर्ड के आधार पर धन के स्रोत और उसके लेनदेन का पता चल जाता है, तो रिमांड अवधि के दौरान और भी बरामदगी हो सकती है।

इससे पहले सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मामले में अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर की गई इस जांच में दान राशि की गिनती के दौरान व्यवस्थित तरीके से नकदी चोरी किए जाने का खुलासा हुआ है।

एसआईटी के अनुसार, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच की सीसीटीवी फुटेज में करीब 70 ऐसे मामले सामने आए, जिनमें गिनती करने वाले कर्मचारी नोटों की गड्डियां और नकदी अपने कपड़ों, जूतों तथा अन्य निजी सामान में छिपाते हुए दिखाई दिए।

जांच में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पांडे और रामाशंकर मिश्रा के खिलाफ प्रथम दृष्टया साक्ष्य मिले हैं। इन सभी के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है।

एसआईटी रिपोर्ट में निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियों की भी ओर इशारा किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के साथ विस्तृत समझौता (एमओयू) और मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) होने के बावजूद प्रवेश और निकास पर कर्मचारियों की तलाशी नहीं ली जा रही थी, बायोमेट्रिक उपस्थिति की व्यवस्था नहीं थी, अलग-अलग दान पात्रों की राशि को मिलाकर गिना जा रहा था, ड्रेस कोड और निजी सामान पर प्रतिबंध का पालन नहीं कराया गया तथा दान पेटियों की चाबियों तक अनधिकृत लोगों की पहुंच भी थी।

रिपोर्ट में पूर्व ट्रस्टी अनिल मिश्रा और दान राशि गिनती के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव को निगरानी में लापरवाही के लिए जिम्मेदार ठहराया गया है।

एसआईटी के अनुसार, जांच शुरू होने से पहले ही आरोपियों के पास से करीब 78.94 लाख रुपये नकद और अन्य सामान बरामद किया जा चुका था। बैंक खातों की जांच में उनकी आय की तुलना में कहीं अधिक राशि जमा होने के संकेत मिले हैं।

इस बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए महासचिव चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए हैं। ट्रस्ट ने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सुधारात्मक कदम उठाने की भी घोषणा की है। वहीं, एसआईटी ने कहा है कि मामले की जांच जारी रहेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए संस्थागत सुधारों की भी सिफारिश की जाएगी।

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