स्व-सहायता समूह से जुड़ने के बाद बढ़ी आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक पहचान
जबलपुर। मेहनत, सीखने की ललक और कुछ नया करने का जज्बा हो तो परिस्थितियां सफलता की राह में बाधा नहीं बन सकतीं। शहपुरा विकासखंड के ग्राम भमकी की श्रीमती अनिता पटेल ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया है। वर्तमान में वे पशु सखी और बीमा सखी के रूप में कार्य करते हुए प्रतिमाह करीब 15 हजार रुपये की आय अर्जित कर रही हैं।
अनिता ने 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद जबलपुर के आयुर्वेद कॉलेज से नर्सिंग का डिप्लोमा किया। उन्होंने गांव के मिडिल स्कूल में करीब सात माह अतिथि शिक्षक तथा जबलपुर के निजी अस्पताल में लगभग दो वर्ष नर्स के रूप में कार्य किया। सिलाई का प्रशिक्षण लेकर महिलाओं को निःशुल्क सिलाई सिखाने का काम भी किया। शिक्षक बनने के उद्देश्य से उन्होंने डीएड. किया, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों और पति के दुर्घटनाग्रस्त होने के कारण पढ़ाई रोकनी पड़ी।
इसी दौरान आजीविका मिशन के माध्यम से उन्हें स्व-सहायता समूह से जुड़ने की जानकारी मिली। जुलाई 2019 में उन्होंने महिलाओं के साथ मिलकर नर्मदा स्व-सहायता समूह का गठन किया और अध्यक्ष बनीं। इसके बाद ग्राम संगठन और संकुल स्तरीय संगठन में भी अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
समूह से जुड़कर उन्होंने पशु सखी, कृषि सखी और बीमा सखी का प्रशिक्षण प्राप्त किया। उन्होंने पशुपालन, कृषि और बीमा संबंधी कार्य शुरू किए। एलआईसी से जुड़े कार्य भी कर रही हैं।
20 हजार रुपये के ऋण से खरीदी गाय
स्व-सहायता समूह से मिले 20 हजार रुपये के ऋण से अनिता ने गाय खरीदी और दूध बेचने का काम शुरू किया। आय से ऋण चुकाने के बाद उन्होंने खेती के लिए दोबारा ऋण लिया। परिवार के पास करीब पौने दो एकड़ जमीन है और सिकमी पर जमीन लेकर भी खेती की जाती है।
अनिता का कहना है कि समूह से जुड़ने के बाद आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ समाज में उनकी पहचान और सम्मान भी बढ़ा है। वे अन्य महिलाओं को भी विभिन्न गतिविधियों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रही हैं।


