जबलपुर। केन-बेतवा लिंक परियोजना के पर्यावरणीय प्रभावों को लेकर दायर जनहित याचिका पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से सेंट्रल एम्पावर्ड कमेटी (CEC) की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिका में दावा किया गया है कि परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व का आधे से अधिक हिस्सा डूब क्षेत्र में आ सकता है और करीब 60 लाख पेड़ों की कटाई होने का अनुमान है। मामले की अगली सुनवाई 13 अक्टूबर को होगी।
मुख्य न्यायाधीश अल्पेश यशवंत कोगजे और न्यायमूर्ति विवेक जैन की खंडपीठ ने केंद्र से CEC रिपोर्ट में उल्लेखित अनियमितताओं, सुप्रीम कोर्ट में लंबित कार्यवाही और रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश सरकार द्वारा की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है।
जबलपुर के अधिवक्ता अरिहंत तिवारी की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि परियोजना से पन्ना टाइगर रिजर्व के वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और उनके आवागमन के गलियारे प्रभावित होंगे। बाघ, तेंदुआ और गिद्ध सहित कई प्रजातियों पर खतरे की आशंका भी जताई गई है।
याचिका में केन घड़ियाल अभयारण्य पर संभावित प्रभावों का पर्याप्त आकलन नहीं किए जाने और वर्ष 2017 की पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा छतरपुर जिले में आदिवासियों और किसानों के विरोध प्रदर्शन तथा प्रशासनिक दबाव के आरोप भी लगाए गए हैं।
केन-बेतवा परियोजना का उद्देश्य केन नदी के अतिरिक्त जल को बेतवा बेसिन तक पहुंचाकर बुंदेलखंड में सिंचाई और पेयजल की उपलब्धता बढ़ाना है। हालांकि, याचिका में परियोजना के पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों का व्यापक वैज्ञानिक मूल्यांकन कराने की मांग की गई है।


