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October 10, 2026
सी टाइम्स
राष्ट्रीय

त्योहारी सीजन में ऑनलाइन ठगी से रहें सावधान, राजस्थान पुलिस ने नकली सेल ऑफर और फर्जी लिंक से बचने की दी चेतावनी



जयपुर, 9 अक्टूबर । राजस्थान के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कुमार शर्मा के निर्देशों पर अमल करते हुए, राजस्थान पुलिस की साइबर क्राइम ब्रांच (आर4सी) ने फ्लिपकार्ट की ‘बिग बिलियन डेज’ और अमेजन की ‘ग्रेट इंडियन फेस्टिवल’ जैसी बड़ी ई-कॉमर्स सेल के दौरान साइबर धोखाधड़ी से लोगों को बचाने के लिए एक विस्तृत एडवाइजरी जारी की है।

पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक (साइबर अपराध) वी.के. सिंह ने कहा कि साइबर अपराधी अक्सर बड़ी ऑनलाइन सेल के दौरान खरीदारों को भारी छूट, सीमित समय के ऑफर और आकर्षक कैशबैक स्कीम का लालच देकर निशाना बनाते हैं।



“आज ही खरीदें”, “सिर्फ दो मिनट बचे हैं” और “अभी भुगतान करें वरना ऑफर खत्म हो जाएगा” जैसे संदेश ग्राहकों पर जल्दबाजी में फ़ैसले लेने का दबाव बनाने के लिए बनाए जाते हैं।



धोखाधड़ी करने वाले लोग अनजान खरीदारों को ठगने के लिए नकली वेबसाइट, नकली मोबाइल ऐप, संदिग्ध लिंक और धोखे वाले पेमेंट तरीकों का इस्तेमाल कर सकते हैं।



राजस्थान पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने लोगों से ऑनलाइन खरीदारी करते समय सतर्क रहने और भुगतान करने से पहले ऑफर की सच्चाई की जांच करने की अपील की है।

उसने कहा कि सावधानी बरतने और आधिकारिक प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने से ऐसी धोखाधड़ी का शिकार होने का जोखिम काफी कम हो सकता है।

राजस्थान पुलिस ने ऑनलाइन खरीदारों के लिए कुछ सुझाव जारी किए हैं, जिनमें सिर्फ इसलिए जल्दबाजी में भुगतान न करना शामिल है क्योंकि किसी ऑफर में भारी छूट का वादा किया गया हो।

ग्राहकों को सलाह दी गई है कि वे ई-कॉमर्स कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर डील्स की जांच करें और वाट्सअप, एसएमएस या सोशल मीडिया के जरिए मिले अनजान लिंक से खरीदारी करने से बचें।

सलाह में वेबसाइट डोमेन की सावधानीपूर्वक जांच करने की भी बात कही गई है, क्योंकि एचटीटीपीएस या पैडलॉक आइकन होने का मतलब हमेशा यह नहीं होता कि वेबसाइट असली है

मोबाइल ऐप केवल आधिकारिक गूगल प्ले स्टोर और ऐपल प्ले स्टोर से ही डाउनलोड किए जाने चाहिए।

उपयोगकर्ताओं को याद दिलाया गया है कि भुगतान को मंज़ूरी देने के लिए यूपीआई पीन की जरूरत होती है, न कि पैसे पाने के लिए, और उन्हें रिफंड या कैशबैक पाने के लिए कभी भी अपना पीन दर्ज नहीं करना चाहिए या क्यूआर कोड स्कैन नहीं करना चाहिए।

उन्हें यह भी सलाह दी गई है कि वे गूगल सर्च या सोशल मीडिया पर मिले कस्टमर केयर नंबरों पर आँख बंद करके भरोसा न करें और इसके बजाय आधिकारिक ऐप और वेबसाइट पर दिए गए सपोर्ट विकल्पों का इस्तेमाल करें।


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