आचार्य श्री रोहित रिछारिया जी ने सुनाई प्रभु श्रीराम और हनुमान जी के दिव्य मिलन की कथा; शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की विभिन्न श्रेणियों में चयनित दुर्गा उत्सव समितियों को किया जाएगा सम्मानित
बालाघाट। श्री सिद्ध पीठ विष्णुधाम मंदिर, हीरापुर, बालाघाट में आयोजित दिव्य श्री हनुमंत कथा के दूसरे दिन श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण रहा। कथा व्यासपीठ पर विराजमान परम पूज्य आचार्य श्री रोहित रिछारिया जी के श्रीमुख से भगवान श्रीराम और उनके परम भक्त हनुमान जी के दिव्य मिलन का भावपूर्ण प्रसंग सुनकर श्रद्धालु भक्तिरस में सराबोर हो गए। कार्यक्रम का शुभारंभ मंदिर के अध्यक्ष श्री किरण भाई त्रिवेदी द्वारा विधि-विधान से व्यासपीठ पूजन के साथ किया गया। इसके पश्चात आचार्य श्री का आत्मीय स्वागत किया गया और कथा का शुभारंभ हुआ।
कथा के दौरान आचार्य श्री रोहित रिछारिया जी ने भगवान श्रीराम और हनुमान जी के प्रथम मिलन का विस्तारपूर्वक वर्णन किया। उन्होंने हनुमान जी की अनन्य रामभक्ति, निष्ठा, समर्पण और सेवाभाव का महत्व बताते हुए कहा कि हनुमान जी का संपूर्ण जीवन प्रत्येक भक्त के लिए आदर्श है। प्रभु श्रीराम के प्रति उनकी अटूट श्रद्धा और निस्वार्थ सेवा हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में अहंकार और स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता। भक्त का अपने आराध्य के प्रति पूर्ण विश्वास और समर्पण ही भक्ति का वास्तविक स्वरूप है।
आचार्य श्री ने हनुमान जी के चरित्र के माध्यम से श्रद्धालुओं को विनम्रता, साहस, बुद्धिमत्ता, सदाचार और सेवा के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। कथा के दौरान भक्तिमय वातावरण बना रहा और श्रद्धालुओं ने भावपूर्वक भगवान श्रीराम एवं हनुमान जी की महिमा का श्रवण किया। कथा के समापन के पश्चात श्रद्धालुओं के बीच महाप्रसाद का वितरण किया गया।
दुर्गा पंडाल प्रतियोगिता के विजेताओं की घोषणा
श्री हनुमंत कथा के आयोजन के साथ श्री सिद्ध पीठ विष्णुधाम मंदिर समिति द्वारा आयोजित दुर्गा पंडाल प्रतियोगिता के चयनित प्रतिभागियों की घोषणा भी की गई है। इस प्रतियोगिता में शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों की दुर्गा उत्सव समितियों ने मां दुर्गा की प्रतिमा, पंडाल डेकोरेशन तथा अनुशासन एवं धार्मिक वातावरण जैसी श्रेणियों में सहभागिता की थी। प्रतियोगिता का उद्देश्य दुर्गा उत्सव समितियों के प्रयासों को प्रोत्साहित करना और धार्मिक आयोजनों में रचनात्मकता, स्वच्छता, अनुशासन एवं सांस्कृतिक मूल्यों को बढ़ावा देना है।
मंदिर समिति के अध्यक्ष श्री किरण भाई त्रिवेदी ने बताया कि धार्मिक आयोजन समाज को जोड़ने और हमारी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। दुर्गा पंडाल प्रतियोगिता के माध्यम से विभिन्न समितियों द्वारा किए गए प्रयासों को सम्मान देने की पहल की गई है। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता में सहभागी सभी समितियां सम्मान की पात्र हैं। इसी भावना के साथ चयनित विजेता समितियों के अतिरिक्त प्रतियोगिता में शामिल अन्य सभी समितियों को भी सांत्वना पुरस्कार एवं सम्मान पत्र प्रदान किए जाएंगे।
शहरी क्षेत्र में चयनित समितियां
मां दुर्गा प्रतिमा श्रेणी
1. नव शक्ति दुर्गा उत्सव समिति, वार्ड क्रमांक 18, मिड टाउन के सामने, बालाघाट।
2. नया सराफा दुर्गा उत्सव समिति, बालाघाट।
3. आराधना दुर्गा उत्सव समिति, राजघाट चौक, बालाघाट।
पंडाल डेकोरेशन श्रेणी
1. विंध्यवासिनी दुर्गा उत्सव समिति, भटेरा रोड, बालाघाट।
2. नव जागृति दुर्गा उत्सव समिति, जोड़ा महुआ, बूढ़ी, बालाघाट।
3. जन जागृति दुर्गा उत्सव समिति, झांसी रानी चौक, वार्ड क्रमांक 32, बालाघाट।
अनुशासन एवं धार्मिक वातावरण श्रेणी
1. श्री सार्वजनिक बंगाली दुर्गा उत्सव समिति, बालाघाट।
2. नव जागृति दुर्गा उत्सव समिति, जोड़ा महुआ, बूढ़ी।
3. श्री सार्वजनिक गुजराती समाज दुर्गा उत्सव समिति, बालाघाट।
ग्रामीण क्षेत्र में चयनित समितियां
मां दुर्गा प्रतिमा श्रेणी
1. मां महाकाली सेवा समिति, वार्ड क्रमांक 13, सियरपाठ, बैहर।
2. मां सिंहवाहिनी दुर्गा उत्सव समिति, पुरानी गुजरी चौक, लांजी।
3. जय माता दी दुर्गा उत्सव समिति, वार्ड क्रमांक 4, देवटोला, बालाघाट।
पंडाल डेकोरेशन श्रेणी
1. मां महाकाली सेवा समिति, वार्ड क्रमांक 13, सियरपाठ, बैहर।
2. नव दुर्गा उत्सव समिति, वार्ड क्रमांक 3, वारासिवनी।
3. सद्भावना मित्र मंडल समिति, बस स्टैंड, लांजी।
अनुशासन एवं धार्मिक वातावरण श्रेणी
1. सार्वजनिक दुर्गा उत्सव समिति, मॉयल लिमिटेड, भरवेली।
2. मां सरस्वती महोत्सव समिति, लालबर्रा।
3. श्री गणेश नवदुर्गा उत्सव समिति, गंज बाजार, लालबर्रा।
सभी सहभागी समितियों से कथा में पहुंचने की अपील
मंदिर समिति की ओर से सभी चयनित विजेता समितियों एवं प्रतियोगिता में सहभागी अन्य सभी दुर्गा उत्सव समितियों से आग्रह किया गया है कि वे श्री सिद्ध पीठ विष्णुधाम मंदिर, हीरापुर में आयोजित श्री हनुमंत कथा में पहुंचकर पूज्य आचार्य श्री रोहित रिछारिया जी के हाथों अपना पुरस्कार एवं सम्मान पत्र प्राप्त करें।
मंदिर समिति के अनुसार, इस पहल का उद्देश्य केवल प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित करना नहीं, बल्कि धार्मिक आयोजनों में योगदान देने वाले प्रत्येक मंडल का उत्साहवर्धन करना है। इससे समाज में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक चेतना, आपसी सद्भाव और सकारात्मक प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।
श्री सिद्ध पीठ विष्णुधाम मंदिर, हीरापुर में आयोजित श्री हनुमंत कथा और दुर्गा पंडाल प्रतियोगिता का सम्मान समारोह धार्मिक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों को एक साथ जोड़ने का प्रयास है। एक ओर आचार्य श्री रोहित रिछारिया जी की कथा से श्रद्धालु भगवान श्रीराम और हनुमान जी की भक्ति से प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दुर्गा उत्सव समितियों को सम्मानित कर समाज में धार्मिक परंपराओं के संरक्षण और सामूहिक सहभागिता का संदेश दिया जा रहा है।


