कोलकाता, 7 जुलाई तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित प्रवक्ता रिजु दत्ता ने पश्चिम बंगाल की कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और पंचायत व्यवस्था को लेकर कई महत्वपूर्ण टिप्पणियां की हैं। उन्होंने दावा किया कि सत्ता में रहने और विपक्ष में होने के दौरान प्रशासनिक व्यवहार में स्पष्ट अंतर देखने को मिलता है।
तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के निलंबित प्रवक्ता रिजु दत्ता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि लालबाजार स्थित पुलिस मुख्यालय में एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी ने उनसे कहा था कि जब आप सत्ता में होते हैं, तब आपको 80 प्रतिशत सुविधाएं मिलती हैं और जब सत्ता में नहीं होते, तब केवल 20 प्रतिशत सुविधाएं मिलती हैं।
रिजु दत्ता ने राज्य की पंचायत व्यवस्था को लेकर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि पंचायत के कई जनप्रतिनिधि विभिन्न कारणों से नियमित रूप से कार्यालय नहीं आ रहे हैं, जिससे आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं।
उन्होंने इस मुद्दे पर दिलीप घोष की उस टिप्पणी का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि काम पर नहीं आने वालों को अंडों की जगह पत्थर मारे जाएंगे। हालांकि, रिजु दत्ता ने स्पष्ट किया कि वह व्यक्तिगत रूप से इस बयान का समर्थन नहीं करते। उन्होंने कहा कि दिलीप घोष के प्रति उनके मन में सम्मान है, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसक भाषा या कार्रवाई उचित नहीं मानी जा सकती।
राज्य की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए रिजु दत्ता ने कहा कि सीएम सुवेंदु अधिकारी के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था को संभालने की है। उन्होंने कहा कि बंगाल एक बड़ा और संवेदनशील राज्य है, जहां लंबे समय से राजनीतिक और सामाजिक हिंसा की घटनाएं होती रही हैं। ऐसे में किसी भी सरकार के लिए विकास कार्यों के साथ-साथ कानून-व्यवस्था बनाए रखना सबसे बड़ी परीक्षा होगी।
उन्होंने हाल की आपराधिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि बारुईपुर में एक नाबालिग बच्ची के कथित सामूहिक दुष्कर्म और हत्या की घटना ने पूरे राज्य को झकझोर दिया। इसके अलावा, उसी क्षेत्र में एक फुटबॉल मैच को लेकर 17 वर्षीय युवक की हत्या भी हुई। ऐसी घटनाएं इस बात का संकेत हैं कि राज्य में कानून-व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है। सरकार की प्राथमिकता विकास के साथ-साथ नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी होना चाहिए।


