मुंबई, बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने आरोप लगाया है कि धेनु बिल्डकॉन इंफ्रा लिमिटेड ने आपस में जुड़ी संस्थाओं के नेटवर्क का इस्तेमाल करते हुए 25 करोड़ रुपए की मूल राशि को बार-बार इधर-उधर घुमाया, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि कंपनी को 1,000 करोड़ रुपए का वास्तविक असुरक्षित कर्ज मिला था। ये आरोप सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय द्वारा पारित अंतरिम आदेश में लगाए गए हैं। नियामक के अनुसार, इस कथित व्यवस्था को सुरेंद्र कुमार जैन और वीरेंद्र जैन ने संचालित किया और इसमें धेनु बिल्डकॉन तथा कंपनी से जुड़ी कई संस्थाएं शामिल थीं। सेबी ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान धेनु बिल्डकॉन को कथित तौर पर सात संस्थाओं से 1,000 करोड़ रुपए का असुरक्षित कर्ज मिला। इसके बाद कंपनी ने दिसंबर 2025 में इन छह संस्थाओं को प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए कथित 840 करोड़ रुपए के कर्ज को इक्विटी में बदल दिया।
हालांकि, लेनदेन में कथित रूप से शामिल संस्थाओं के बैंक खातों की जांच से पता चला कि कथित 1,000 करोड़ रुपए की राशि का प्रवाह आपस में जुड़ी संस्थाओं के खातों के जरिए 25 करोड़ रुपए की एक ही मूल राशि को बार-बार अलग-अलग स्तरों पर घुमाने और प्रसारित करने से तैयार किया गया था।नियामक ने आगे आरोप लगाया कि शुरुआती 25 करोड़ रुपए की राशि भी अन्य जुड़ी हुई संस्थाओं से जुड़े संदिग्ध फंड लेनदेन से आई थी। सेबी ने एक असंबंधित मामले में तलाशी और जब्ती की कार्रवाई के दौरान बरामद चैट संदेशों और कॉल रिकॉर्ड का भी जिक्र किया। नियामक ने कहा कि इनसे इस नेटवर्क पर कथित रूप से किए जा रहे नियंत्रण के सबूत मिले।


